रेखा की अमिताभ बच्चन के साथ काम करने की कहानी: घबराहट से आत्मविश्वास तक का सफर
रेखा और अमिताभ बच्चन की जोड़ी का सफर
मुंबई, 9 अक्टूबर। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में रेखा और अमिताभ बच्चन का नाम हमेशा एक साथ लिया जाता है, और उनकी फिल्मों तथा जोड़ी की चर्चा होती है। दोनों ने कई सफल फिल्मों में साथ काम किया है, जिन्हें दर्शकों ने बेहद पसंद किया। हालांकि, रेखा के लिए अमिताभ के साथ काम करना शुरू में आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी आया जब वह अमिताभ के सामने आते ही इतनी घबरा जाती थीं कि अपने संवाद भी भूल जाती थीं। यह खुलासा रेखा ने एक पुराने इंटरव्यू में किया था।
रेखा ने सिमी ग्रेवाल के प्रसिद्ध शो 'रेंडेजवस विद सिमी ग्रेवाल' में अमिताभ के साथ अपने अनुभव साझा किए थे। लेखक यासिर उस्मान ने अपनी किताब 'रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी' में भी इस बातचीत का जिक्र किया है। रेखा ने बताया कि अमिताभ के साथ काम करने के शुरुआती दिनों में वह काफी नर्वस रहती थीं। फिल्म 'दीवार' में अमिताभ का अभिनय देखकर उनके मन में उनके प्रति बहुत सम्मान था, और वह खुद पर शानदार अभिनय का दबाव महसूस करने लगी थीं।
रेखा और अमिताभ ने पहली बार 1976 में 'दो अनजाने' फिल्म में साथ काम किया। इस फिल्म में अमिताभ ने अमित रॉय का किरदार निभाया, जबकि रेखा उनकी पत्नी रेखा रॉय के रूप में नजर आईं। फिल्म की कहानी एक पति-पत्नी के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें महत्वाकांक्षा, धोखा और बदले की भावना शामिल है।
अपने अनुभव को याद करते हुए रेखा ने कहा कि अमिताभ के सामने वह अपनी लाइन्स बोलने में घबराती थीं। उनकी घबराहट इतनी अधिक होती थी कि कई बार डायलॉग याद होने के बावजूद वह उन्हें सही से नहीं बोल पाती थीं। एक दिन अमिताभ ने उनसे कहा, 'सुनिए... जरा डायलॉग याद कर लीजिएगा।' इस सलाह ने रेखा को प्रेरित किया और उन्होंने अपने ऊपर काम करना शुरू किया, जिससे उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
'दो अनजाने' के बाद, रेखा और अमिताभ ने 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'मिस्टर नटवरलाल' और 'सुहाग' जैसी कई सफल फिल्मों में साथ काम किया। इन फिल्मों ने उनकी जोड़ी को दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। विशेष रूप से 'मुकद्दर का सिकंदर' में उनकी जोड़ी को दर्शकों ने बहुत सराहा। समय के साथ, उनकी जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक बन गई।