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रितेश देशमुख ने साझा की अपनी फिल्म यात्रा और मराठी सिनेमा की चुनौतियाँ

रितेश देशमुख ने मुंबई में आयोजित 'विज़न इंडिया' कार्यक्रम में अपने करियर की शुरुआत और मराठी सिनेमा की चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे हिंदी सिनेमा ने प्रगति की है जबकि मराठी सिनेमा पीछे रह गया है। उनके अनुभव और विचारों से यह स्पष्ट होता है कि फिल्म उद्योग में संसाधनों और दर्शकों की संख्या का कितना महत्व है। जानें उनके विचार और अनुभव के बारे में इस लेख में।
 

मुंबई में 'विज़न इंडिया' कार्यक्रम में रितेश देशमुख का अनुभव

मुंबई, 15 मार्च। समाजवादी पार्टी ने मुंबई में 'विज़न इंडिया' नामक एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता और निर्देशक रितेश देशमुख ने भाग लिया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत के बारे में खुलकर बात की और यह भी बताया कि क्यों महाराष्ट्र में फिल्म उद्योग होने के बावजूद मराठी सिनेमा पीछे रह गया है जबकि हिंदी सिनेमा आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में रितेश ने बताया कि वे कभी भी अभिनेता बनने की इच्छा नहीं रखते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें इस क्षेत्र में लाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, "मेरा सपना आर्किटेक्ट बनने का था और मैंने उसी दिशा में पढ़ाई की। लेकिन एक अवसर ने मेरी जिंदगी बदल दी। मुझे फिल्मों में काम करने का मौका मिला, और मुझे आर्किटेक्ट और अभिनय के बीच चयन करना था। मैंने अभिनय को चुना।"

अपने पिता के समर्थन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मेरे परिवार ने हमेशा मेरा समर्थन किया। मुख्यमंत्री होने के बावजूद, उन्होंने मुझसे कभी नहीं पूछा कि मैं अभिनय क्यों कर रहा हूँ। उन्होंने हमेशा कहा कि जो तुम चाहो, वही करो और उसमें सर्वश्रेष्ठ बनो।"

जब मराठी सिनेमा की तुलना हिंदी सिनेमा से की गई, तो उन्होंने कहा, "फिल्म उद्योग की नींव महाराष्ट्र में रखी गई है, और यहां अन्य राज्यों की तुलना में अधिक संसाधन हैं। फिर भी, तेलुगू, कन्नड़, और मलयालम सिनेमा ने मराठी सिनेमा से अधिक प्रगति की है। दक्षिण भारत में क्षेत्रीय भाषा में फिल्में बनती हैं और दर्शकों की संख्या भी अधिक होती है, जबकि महाराष्ट्र में हिंदी फिल्मों पर अधिक जोर दिया जाता है।"

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मराठी फिल्मों का बजट 2-5 करोड़ के बीच होता है, जबकि हिंदी फिल्मों का बजट 100 करोड़ से अधिक होता है। यदि किसी को 200 रुपए में 5 करोड़ और 100 करोड़ की फिल्म देखने का मौका मिले, तो वह निश्चित रूप से बड़े बजट की फिल्म को चुनेगा। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने प्रोडक्शन शुरू किया, तो उनके पिता ने पूछा कि वे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं, लेकिन मराठी सिनेमा का क्या? इसलिए उन्होंने अपनी फिल्म कंपनी में 6 मराठी फिल्में बनाई हैं।

--समाचार स्रोत

पीएस/एएस