राम गोपाल वर्मा ने पारंपरिक शिक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल, क्या है उनका नया दृष्टिकोण?
राम गोपाल वर्मा का शिक्षा प्रणाली पर बयान
मुंबई, 1 मार्च। फिल्म निर्माता और निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए पारंपरिक शिक्षा प्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पुरानी शिक्षा प्रणाली को समाप्त कर देना चाहिए, क्योंकि यह अब अप्रचलित और बेकार हो चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आगमन से याद करने की आवश्यकता कम हो गई है, और पुराना मॉडल – याद करो, दोहराओ, पास हो जाओ और नौकरी पाओ अब प्रासंगिक नहीं रह गया है।
वर्मा ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि जब जानकारी सीमित थी, तब यह प्रणाली काम करती थी। पहले डॉक्टर बीमारियों को याद करते थे, इंजीनियर फॉर्मूलों को, और वकील केस लॉ को। लेकिन अब एआई कुछ ही सेकंड में लाखों दस्तावेजों का विश्लेषण कर सकता है, जो किसी भी मानव मस्तिष्क के लिए संभव नहीं है। मेडिकल छात्र शरीर विज्ञान को सीखने में वर्षों लगाते हैं, जबकि एआई तुरंत निदान कर सकता है। इंजीनियरिंग के छात्र कैलकुलस और सर्किट नियमों को याद करते थे, लेकिन अब एआई टूल्स सर्किट डिजाइन तैयार करते हैं और कोड लिखते हैं।
उन्होंने मेडिकल शिक्षा का उदाहरण देते हुए कहा, "एक मेडिकल छात्र को ग्रेजुएशन में 5 साल, पोस्ट ग्रेजुएशन में 2 साल और स्पेशलाइजेशन में 2-3 साल लगते हैं। वे शरीर, अंगों और उपचार के बारे में सीखते हैं, लेकिन अगर एआई निदान कर रहा है और सर्जरी रोबोटिक हो रही है, तो माता-पिता अपने बच्चों को ऐसे कोर्स में क्यों भेज रहे हैं जो भविष्य में नौकरी नहीं देंगे?"
वर्मा ने यह भी कहा कि गरीब बच्चे अपने माता-पिता की गलत जानकारी के कारण बलि का बकरा बन रहे हैं। ये बच्चे पुरानी मान्यताओं के चक्रव्यूह में फंसते जा रहे हैं। उन्होंने माता-पिता और शिक्षा के गेटकीपरों को चेताते हुए कहा कि उन्हें बच्चों को एआई में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। बच्चों को विद्रोह करना चाहिए और केवल एआई पर भरोसा करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य माता-पिता और शिक्षकों को नीचा दिखाना नहीं है। वे बदलाव से डरते हैं, क्योंकि वे पुरानी मान्यताओं में बड़े हुए हैं, जो कभी-कभी अंधविश्वास में बदल जाती हैं। बच्चे शिकार बनते हैं, क्योंकि सिस्टम आज्ञाकारिता को पुरस्कृत करता है। यदि कोई बच्चा पूछता है कि एआई कर सकता है तो क्यों याद करूं, तो शिक्षक कहते हैं – यह सिलेबस में है और माता-पिता कहते हैं – बाकी सब कर रहे हैं।
वर्मा का कहना है कि अब समय आ गया है कि पुरानी पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को समाप्त किया जाए, अन्यथा यह अपने आप समाप्त हो जाएगी। बिना सोचे-समझे बैकअप प्लान के खालीपन पैदा हो सकता है, लेकिन सभी को सोचना और मेहनत करनी होगी ताकि युवा नासमझ बड़ों की बलि न चढ़ें। अन्यथा युवा विद्रोह कर अपना भविष्य खुद संभाल लेंगे।