राम गोपाल वर्मा ने 'धुरंधर 2' को बताया फिल्मी जगत का नया मील का पत्थर!
राम गोपाल वर्मा की नई फिल्म पर प्रतिक्रिया
मुंबई, 26 मार्च। फिल्म निर्माता और निर्देशक राम गोपाल वर्मा हाल ही में आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर 2' से काफी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फिल्म की सराहना करते हुए अपने बचपन के सपनों के बारे में कुछ दिलचस्प बातें साझा कीं। वर्मा ने यह भी बताया कि अब वह 'सरकार' की जगह 'सिंडिकेट' पर काम करने की योजना बना रहे हैं।
राम गोपाल वर्मा ने खुलासा किया कि जब वह 10 साल के थे, तब वह ऑटो रिक्शा ड्राइवर बनने का सपना देखते थे, क्योंकि उन्हें उस वाहन की तेज़ आवाज़ बहुत पसंद थी। उन्होंने एक विस्तृत नोट में लिखा, "बदलाव ही एकमात्र स्थिर चीज है, जिसके साथ हम बड़े होते हैं। मेरे जीवन के प्रारंभिक वर्षों में मेरे सपने लगातार बदलते रहे।"
उन्होंने आगे कहा, "जब मैं 10 साल का था, तो ऑटो रिक्शा ड्राइवर बनना चाहता था। फिर 15 साल की उम्र में, चचेरे भाई की प्रेरणा से जंगल में रहने का ख्वाब देखा। कुछ समय बाद इंजीनियर बनने का सपना देखा, लेकिन अंततः मैंने निर्देशक बनने का निर्णय लिया।"
वर्मा ने अपनी पढ़ाई के दौरान पसंदीदा किताबों का भी जिक्र किया। उन्होंने एनिड ब्लाइटन की रचनाओं को पसंद किया, लेकिन जेम्स हैडली चेस के लेखन ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया। बाद में, फ्रेडरिक फोर्सिथ की किताबों ने उन्हें और भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नए अनुभव हमें बदलते हैं और हमारे मानक को ऊंचा उठाते हैं।
अपनी फिल्मों के संदर्भ में, वर्मा ने बताया कि उनकी प्रेरणादायक फिल्में 'द साउंड ऑफ म्यूजिक' (जिससे 'रंगीला' को प्रेरणा मिली), 'एक्सॉर्सिस्ट' (जिससे 'रात' और 'भूत' प्रभावित हुए) और 'गॉडफादर' (जिससे 'सत्या', 'कंपनी' और 'सरकार' श्रृंखला बनी) रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से 'गॉडफादर' से प्रेरणा लेकर कई फिल्में बनाई हैं।
उन्होंने 'धुरंधर: द रिवेंज' की प्रशंसा की और कहा कि इस फिल्म ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने 'सरकार' श्रृंखला की अगली कड़ी को टाल दिया है और अब 'सिंडिकेट' पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। राम गोपाल वर्मा ने लिखा, "जानिए सिंडिकेट क्यों, सरकार क्यों नहीं? सिंडिकेट की कहानी इस विचार पर आधारित है कि अगर भारत की पूरी कानून-व्यवस्था एक दिन में ढह जाए तो क्या होगा? यह एक हॉरर फिल्म की तरह होगी, लेकिन इसमें कोई सुपरनैचुरल तत्व नहीं होगा, बल्कि यह मानव मन में छिपी भयानक चीजों को उजागर करेगी।"
उन्होंने आगे कहा कि 'धुरंधर 2' देखने के बाद उनकी पुरानी फिल्में अब उन्हें कुछ भी नहीं लगतीं। यदि पहले 'गॉडफादर' उनका मानक था, तो अब वह 'धुरंधर 2' को 'गॉडफादर का भी गॉडफादर' मानते हैं। फिल्म के हर पहलू, जैसे कहानी कहने का तरीका, किरदार, बैकग्राउंड म्यूजिक, एक्शन और अभिनय ने उन्हें पूरी तरह से प्रभावित किया।
राम गोपाल वर्मा ने आदित्य धर को अपना नया गुरु मानते हुए कहा कि अब उन्हें पुरानी सोच को छोड़कर नए विचारों को अपनाना होगा। उन्होंने सभी फिल्म निर्माताओं, लेखकों और सितारों से अपील की कि वे 'धुरंधर 2' का गहराई से अध्ययन करें और अपनी पुरानी सोच में बदलाव लाएं, अन्यथा पुरानी फिल्मी सोच टिक नहीं पाएगी।