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राजेश खन्ना के लिव-इन विवाद का अंत: हाई कोर्ट का फैसला

बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनी विवाद का हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने निपटारा किया। अदालत ने अभिनेत्री अनीता आडवाणी की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने संबंधों को कानूनी शादी के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। यह फैसला लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह के बीच के कानूनी अंतर को स्पष्ट करता है। जानें इस फैसले के पीछे की कहानी और इसके कानूनी निहितार्थ।
 

राजेश खन्ना के कानूनी विवाद का निपटारा

बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार, दिवंगत राजेश खन्ना की व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़ा एक पुराना कानूनी मामला अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। हाल ही में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेत्री अनीता आडवाणी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राजेश खन्ना के साथ अपने कथित 'लिव-इन रिलेशनशिप' को वैध शादी के रूप में मान्यता देने की मांग की थी.


कोर्ट का निर्णय

न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने आडवाणी की अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2017 में मुंबई की दिंडोशी सत्र अदालत द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी थी। सत्र अदालत ने जुलाई 2012 में खन्ना के निधन के बाद इसी तरह की राहत के लिए आडवाणी के दीवानी वाद को खारिज कर दिया था.


आडवाणी का दावा

आडवाणी ने यह दावा किया था कि वह खन्ना के साथ कई वर्षों तक 'लिव-इन रिलेशनशिप' में रहीं, जब तक कि 2012 में खन्ना की पत्नी डिंपल कपाडिया, उनकी बेटी ट्विंकल खन्ना और दामाद अक्षय कुमार ने उन्हें अभिनेता के बंगले 'आशीर्वाद' से बेदखल नहीं कर दिया.


कानूनी निहितार्थ

यह निर्णय लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट करता है। भारतीय कानून के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में लंबे समय तक लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को कुछ अधिकार मिलते हैं, लेकिन 'शादी' की मान्यता प्राप्त करने के लिए साक्ष्यों और कानूनी मानदंडों का पालन करना आवश्यक है.


निष्कर्ष

बॉम्बे हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद, राजेश खन्ना की विरासत और उनकी संपत्ति 'आशीर्वाद' से जुड़े दावों पर खन्ना परिवार की स्थिति और मजबूत हो गई है। अनीता आडवाणी के लिए यह एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब उनके पास इस आदेश को चुनौती देने के सीमित विकल्प ही बचे हैं.