×

राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में हाई कोर्ट का बड़ा झटका, 4 फरवरी तक आत्मसमर्पण का आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में 4 फरवरी तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। अदालत ने उनके बार-बार किए गए आश्वासनों को नकारते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। मामला 2010 में लिए गए 5 करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़ा है, जिसे चुकाने में यादव ने देरी की। अदालत ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में वादों का उल्लंघन गंभीर है। अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी।
 

दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख


नई दिल्ली, 3 फरवरी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने चेक बाउंस से संबंधित एक मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। अदालत ने उन्हें 4 फरवरी तक संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने अभिनेता के व्यवहार को निंदनीय बताते हुए कहा कि बार-बार किए गए आश्वासनों के बावजूद भुगतान न करना न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।


मामले का विवरण

यह मामला मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसने राजपाल यादव की कंपनी को फिल्म निर्माण के लिए धन मुहैया कराया था। अदालत ने कहा कि चेक बाउंस जैसे मामलों में भुगतान के लिए दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन गंभीर है।


जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजपाल यादव को कई मौकों पर मौका दिया गया, लेकिन उन्होंने हर बार अदालत का विश्वास तोड़ा।


कर्ज का इतिहास

यह मामला 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली फिल्म 'अता-पता लापता' के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म की आर्थिक असफलता के बाद कर्ज चुकाने में लगातार देरी होती गई।


शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि चेक बाउंस होने के बाद राजपाल यादव और उनकी कंपनी के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मामला दर्ज किया गया।


अदालत की कार्रवाई

कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को कई बार नोटिस भेजे, लेकिन वे लंबे समय तक अदालत में उपस्थित नहीं हुए, जिसके परिणामस्वरूप 2013 में उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में, दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर सजा निलंबित कर दी थी।


निचली अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई, जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी। जून 2024 में, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अभिनेता आदतन अपराधी नहीं हैं और उनके मामले में सुधार की संभावना है।


मध्यस्थता और भुगतान

मध्यस्थता के दौरान, राजपाल यादव ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे शिकायतकर्ता कंपनी को कुल 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। इसमें 40 लाख रुपये की पहली किश्त और 2.10 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त शामिल थी। लेकिन अदालत के अनुसार, तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद एक भी किश्त जमा नहीं की गई।


अभिनेता की ओर से यह तर्क दिया गया कि ड्राफ्ट में टाइपिंग की गलती हुई थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।


अगली सुनवाई

जनवरी 2026 में, कोर्ट ने राजपाल यादव को अंतिम मौका दिया था, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में बार-बार किए गए वादों का उल्लंघन गंभीर है।


कोर्ट ने राजपाल यादव को 4 फरवरी को दोपहर 4 बजे तक आत्मसमर्पण करने की मोहलत दी है। यह राहत उनके वकील के अनुरोध पर दी गई है। अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी, जिसमें जेल अधीक्षक से अनुपालन रिपोर्ट मांगी जाएगी।