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राजकुमार राव और प्रीति जिंटा ने छात्रों के आंदोलन पर दी अपनी राय, शांति की अपील

As protests sweep across the nation, Bollywood stars Rajkummar Rao and Preity Zinta have voiced their opinions, advocating for dialogue and peaceful demonstrations. Rao emphasizes the importance of listening to students, while Zinta supports their demands for educational reforms. Both celebrities stress that violence is not the answer and call for constructive conversations to ensure a brighter future for the youth and democracy. Their messages resonate with the ongoing unrest, highlighting the need for compassion and understanding in these challenging times.
 

बॉलीवुड सितारों की आवाज़ें: छात्रों के आंदोलन पर विचार


देशभर में चल रहे प्रदर्शनों के बीच, कई बॉलीवुड हस्तियों ने अपनी राय व्यक्त की है। हाल ही में राजकुमार राव ने कहा कि संघर्ष के बजाय संवाद की आवश्यकता है। वहीं, अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन जारी रखने की अपील की है, साथ ही शिक्षा सुधारों की मांग की है। अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में, राव ने छात्रों की बात सुनने की अहमियत पर जोर दिया, यह कहते हुए कि जब युवा अनसुने रहते हैं, तो यह समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।


राव ने कहा कि हर व्यक्ति को सम्मान और गरिमा के साथ सुना जाना चाहिए, खासकर जब छात्रों की मांगें देशभर में सुर्खियों में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, चाहे असामंजस्य का कारण कोई भी हो। उनके अनुसार, हिंसा केवल और अधिक विभाजन पैदा करती है। उन्होंने सहानुभूति को प्राथमिकता देते हुए कहा कि छात्रों को अपनी चिंताओं को जिम्मेदारी से व्यक्त करने का पूरा अधिकार है।


उनका संदेश था कि बातचीत से समस्याओं का समाधान किया जाए, न कि संघर्ष से। राव ने कहा कि असली बदलाव संवाद के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी का लक्ष्य एक मजबूत और बेहतर भारत है, और यह तभी संभव है जब शिक्षा सभी के लिए समान और सुलभ हो। इस बीच, प्रीति जिंटा ने भी सोशल मीडिया पर छात्रों के आंदोलन पर प्रतिक्रिया दी, उनके शिक्षा सुधारों की मांग का समर्थन करते हुए शांति की अपील की।


जिंटा ने कहा कि छात्रों का समर्थन करना और उनके भविष्य के लिए सकारात्मक बदलाव की मांग करना आवश्यक है, लेकिन यह भी जरूरी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को किसी भी तरह के असामाजिक तत्वों द्वारा भटकाया न जाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत और विभाजन पर चिंता व्यक्त की, यह सवाल उठाते हुए कि क्या देश के भीतर और बाहर की नकारात्मक शक्तियां छात्रों के गुस्से का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं। जिंटा ने मेहनत, समानता और उत्कृष्टता में विश्वास व्यक्त किया और कहा कि इन मूल्यों से कभी समझौता नहीं होना चाहिए।


उन्होंने लोकतंत्र, कानूनी प्रणाली और सरकार में विश्वास व्यक्त करते हुए सभी पक्षों के बीच सकारात्मक संवाद की उम्मीद की। जिंटा ने आशा जताई कि दोनों पक्ष संवाद में शामिल हों ताकि प्रदर्शनों और चर्चाओं से किसी भी नकारात्मक तत्वों और एजेंडों को समाप्त किया जा सके, जिससे युवाओं और देश के लोकतंत्र के लिए उज्जवल भविष्य सुनिश्चित हो सके।