×

राज शेखर: असिस्टेंट डायरेक्टर से गीतकार बनने की अनोखी कहानी

राज शेखर की यात्रा एक असिस्टेंट डायरेक्टर से एक सफल गीतकार बनने तक की है। उनका सफर 'तनु वेड्स मनु' से शुरू हुआ, जहां उन्होंने डमी गाने लिखकर अपनी पहचान बनाई। आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए, उन्होंने 'सावधान इंडिया' जैसे शो के लिए भी काम किया। आज, उनके गाने जैसे 'तुम हो तो' और 'तबाही' दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं। जानें उनके संघर्ष और सफलता की कहानी।
 

राज शेखर का सफर


मुंबई, 21 सितंबर। राज शेखर आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के उन प्रमुख गीतकारों में से एक हैं, जिनके गानों में कहानी और किरदार की गहराई झलकती है। 'सैयारा' के 'तुम हो तो' से लेकर 'एनिमल' के 'पहले भी मैं' और हाल ही में यश की फिल्म 'टॉक्सिक' के 'तबाही' तक, उनका सफर प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने पहले असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में करियर शुरू किया और फिर एक दिन डमी गाने लिखते-लिखते गीतकार बन गए।


राज शेखर का जन्म 22 सितंबर 1980 को बिहार के मधेपुरा में हुआ। बचपन से ही उन्हें लेखन का शौक था, और उन्होंने कविताएं तथा कहानियां लिखी। आगे की पढ़ाई के लिए वह दिल्ली आए, जहां उन्होंने थिएटर ग्रुप 'प्लेयर्स' के साथ कई नाटकों में काम किया। राज ने एक इंटरव्यू में कहा कि थिएटर ने उनके दृष्टिकोण को बदल दिया और समाज तथा रिश्तों को नए नजरिए से देखने में मदद की।


अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने एक न्यूज चैनल में लेखक के रूप में कुछ समय बिताया। इसके बाद, 2010 में, उन्हें आनंद एल. राय की फिल्म 'तनु वेड्स मनु' में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करने का मौका मिला। राज खुद मानते हैं कि वह असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में बहुत सफल नहीं थे, लेकिन इसी फिल्म ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।


फिल्म के लिए गीतकार की तलाश चल रही थी, और राज से डमी लिरिक्स लिखने के लिए कहा गया। उन्होंने उसी दिन 'मनु भैया' और 'रंगरेज' जैसे गाने लिखे। जब ये गाने आनंद एल. राय को सुनाए गए, तो उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने इन्हें फिल्म में शामिल करने का निर्णय लिया। इस प्रकार, राज शेखर असिस्टेंट डायरेक्टर से अचानक फिल्म के गीतकार बन गए।


'तनु वेड्स मनु' के गाने दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुए। 'रंगरेज', 'यूं ही' और 'मनु भैया' जैसे गानों ने उनकी पहचान को मजबूत किया। हालांकि, इसके बाद लगातार काम मिलना आसान नहीं था। राज ने बताया कि उनके गाने रेडियो पर पसंद किए गए, लेकिन उन्हें उतना काम नहीं मिला जितना उन्होंने अपेक्षित किया था। कुछ फिल्में बंद हो गईं और कुछ रिलीज नहीं हो पाईं। एक समय वह आर्थिक संकट में भी थे, तब उन्होंने 'सावधान इंडिया' जैसे टीवी शो के लिए डायलॉग लिखकर अपना गुजारा किया।


राज शेखर ने एक इंटरव्यू में कहा कि जब वह किसी फिल्म को साइन करते हैं, तो उसके नोट्स बनाते हैं ताकि कहानी और किरदार की भावनाओं को बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकें। 'तुम हो तो', 'पहले भी मैं', 'रंगरेज', 'कितने दफे', 'जाने दे', 'घनी बावरी', 'उड़ता तीतर' और 'तुम्हें दिल्लगी' जैसे उनके गानों में इन भावनाओं की झलक मिलती है।


राज शेखर का नया दौर भी दिलचस्प है। उन्होंने 2026 में 'टॉक्सिक' के गाने 'तबाही' के बारे में बताया कि यह उनके लिए एक अलग अनुभव था। फिल्म कन्नड़ में बनी है, और निर्देशक गीतू मोहनदास मलयालम इंडस्ट्री से हैं। यश कन्नड़ सिनेमा से हैं और संगीत विशाल मिश्रा ने दिया है। विभिन्न भाषाओं और इंडस्ट्री के लोगों के साथ काम करने का अनुभव उनके लिए खास रहा।