रवि किशन की प्रेरणादायक यात्रा: गरीबी से संसद तक का सफर
रवि किशन की कहानी: संघर्ष और सफलता
भोजपुरी सिनेमा के मशहूर अभिनेता और गोरखपुर के सांसद रवि किशन की जिंदगी किसी फिल्मी कथा से कम नहीं है। एक समय ऐसा था जब उन्हें परिवार की जिम्मेदारियों और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आज करोड़ों की संपत्ति और राजनीतिक पहचान के बावजूद, रवि किशन अपने संघर्ष के दिनों को नहीं भूलते हैं। मिट्टी के घर से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री और फिर संसद तक पहुंचने वाले रवि किशन का कहना है कि उनके संघर्ष के अनुभव आज भी उनके व्यवहार और सोच में झलकते हैं।
12 लोगों के बीच खिचड़ी से शुरू हुआ संघर्ष
रवि किशन का बचपन साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी, जिसके कारण कई बार उन्हें खेत गिरवी रखने पड़े। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि कभी-कभी 12 लोगों के बीच एक ही खिचड़ी बनती थी। जीवन में अभाव इतने थे कि छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था।
मुंबई में संघर्ष और वड़ा पाव
बड़े सपनों के साथ रवि किशन मुंबई आए, लेकिन यहां भी उन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ा। काम की तलाश में उन्होंने कई साल बिताए और शुरुआती दिनों में वड़ा पाव और चाय पर गुजारा किया। उन्होंने बताया कि लगभग 15 साल तक काम करने के बावजूद उन्हें उचित पैसे नहीं मिले। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे भोजपुरी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई।
भोजपुरी से बॉलीवुड और राजनीति तक का सफर
रवि किशन ने भोजपुरी सिनेमा में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया और इसके बाद हिंदी फिल्मों और OTT प्लेटफॉर्म पर भी अपनी पहचान बनाई। अब तक उन्होंने 750 से अधिक फिल्मों में काम किया है। अभिनय के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और वर्तमान में गोरखपुर से दूसरी बार लोकसभा सांसद हैं।
साधारण जीवनशैली और परिवार की प्राथमिकता
रवि किशन की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सफलता और धन मिलने के बावजूद उनका व्यवहार साधारण है। उन्होंने कहा कि जब वह किसी सेवन स्टार होटल में जाते हैं, तो महंगा खाना ऑर्डर करने में उन्हें झिझक होती है। वह आज भी खिचड़ी ऑर्डर करते हैं। उनके अनुसार, परिवार पर खर्च करना उन्हें ज्यादा खुशी देता है।
गरीबी से बाहर निकलने के बावजूद सोच वही
रवि किशन बताते हैं कि उनकी पत्नी और बच्चे उन्हें फोन, कपड़े और जूते जैसी चीजें खरीदते हैं, लेकिन वह परिवार की जरूरतों को पूरा करने में पीछे नहीं हटते। उनका कहना है कि वह गरीबी से बाहर निकल आए हैं, लेकिन गरीबी के दिनों की सीख और मानसिकता आज भी उनके अंदर मौजूद है। रवि किशन की कहानी यह दर्शाती है कि सफलता के बाद भी इंसान अपने संघर्षों और जड़ों को नहीं भूलता। मिट्टी के घर से संसद तक पहुंचने वाले रवि किशन आज भी अपने पुराने दिनों को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हैं।