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रणबीर कपूर ने साझा किया राज कपूर के स्टारडम का अनोखा किस्सा

रणबीर कपूर ने हाल ही में अपने दादा राज कपूर के स्टारडम के बारे में एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे रूस में राज कपूर की फिल्म 'आवारा' की स्क्रीनिंग के दौरान एक बड़ी भीड़ ने उनकी कार को उठाकर होटल तक पहुंचा दिया। इसके अलावा, रणबीर ने अपने स्कूल के दिनों की कुछ यादें भी साझा की, जिसमें प्रिंसिपल द्वारा दी गई सजा का जिक्र किया। यह कहानी कपूर परिवार की अद्वितीय विरासत और रणबीर के अनुभवों को उजागर करती है।
 

राज कपूर का अद्वितीय स्टारडम

रणबीर कपूर का राज कपूर के स्टारडम पर विचार: हिंदी फिल्म उद्योग में कपूर परिवार की उपस्थिति कई पीढ़ियों से बनी हुई है। पृथ्वीराज कपूर ने इस यात्रा की शुरुआत की, जिसके बाद राज कपूर ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। उनके बाद ऋषि कपूर और रणबीर कपूर ने भी इस परंपरा को जारी रखा है। आज, कपूर परिवार की प्रसिद्धि से हर कोई परिचित है, लेकिन राज कपूर की रूस में मिली लोकप्रियता के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। रणबीर कपूर ने अपने दादा के स्टारडम को याद करते हुए एक दिलचस्प घटना साझा की, जिसमें बताया कि कैसे लोगों ने उनकी कार को उठाकर होटल तक पहुंचा दिया था। आइए जानते हैं इस किस्से के बारे में…


राज कपूर की रूस में लोकप्रियता

आज रणबीर कपूर अपना 43वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने बचपन की यादों और राज कपूर की रूस में लोकप्रियता के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि जो स्टारडम उन्हें और उनकी पीढ़ी के अन्य कलाकारों को मिलता है, वह उनके दादा के स्टारडम के मुकाबले जल्दी समाप्त हो जाता है। रणबीर ने एक घटना साझा की जब राज कपूर फिल्म 'आवारा' की स्क्रीनिंग के दौरान रूस में थे। जब वह थिएटर से बाहर आए, तो एक बड़ी भीड़ उनके मिलने का इंतजार कर रही थी। उन्होंने बताया कि उस भीड़ ने उनकी कार को उठाकर होटल तक ले जाने का काम किया। यह वास्तव में एक अद्वितीय स्टारडम का उदाहरण है।


रणबीर की स्कूल में अनुभव

रणबीर कपूर ने यह भी बताया कि उन्होंने मुंबई के एक कान्वेंट स्कूल, स्कॉटिश में पढ़ाई की। वहां के प्रिंसिपल ने उन्हें एक बार सजा दी थी। उन्होंने बताया कि प्रिंसिपल ने उन्हें एक कॉरिडोर से दूसरे कॉरिडोर तक थप्पड़ मारा था। हालांकि, उन्होंने कहा कि स्कूल में उनके साथ कुछ खास व्यवहार नहीं होता था, लेकिन वह खुद को क्लास के उन 40 बच्चों में विशेष मानते थे, क्योंकि सभी उनके बारे में जानने के लिए हमेशा उत्सुक रहते थे।