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यश जौहर: मिठाई की दुकान से लेकर बॉलीवुड के बादशाह तक का सफर

यश जौहर, धर्मा प्रोडक्शंस के संस्थापक, ने बॉलीवुड को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका सफर मिठाई की दुकान से शुरू होकर एक सफल फिल्म निर्माता बनने तक फैला है। यश जौहर का जीवन संघर्ष और सफलता की कहानी है, जिसमें उन्होंने कई हिट फिल्मों का निर्माण किया। उनके बेटे करण जौहर ने उनके सपनों को आगे बढ़ाया। जानें यश जौहर की प्रेरणादायक कहानी और उनके योगदान के बारे में।
 

यश जौहर का अद्भुत सफर




मुंबई, 5 सितंबर। धर्मा प्रोडक्शंस के संस्थापक यश जौहर को हिंदी सिनेमा के उन प्रमुख निर्माताओं में गिना जाता है, जिन्होंने बॉलीवुड को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। यश जौहर का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनका जन्म 6 सितंबर 1929 को हुआ था और उन्होंने साधारण नौकरी से अपने करियर की शुरुआत की।


यश जौहर का जन्म पंजाब (अब पाकिस्तान) में हुआ था, और विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया। यहां उनके पिता ने मिठाई की दुकान खोली। यश अपने 9 भाई-बहनों में सबसे अधिक पढ़े-लिखे थे, इसलिए उन्हें दुकान पर बैठाया गया, लेकिन उन्हें यह काम पसंद नहीं था।


कुछ समय बाद, यश जौहर ने अपनी मां की मदद से मुंबई का रुख किया। शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। उन्होंने एक प्रसिद्ध अंग्रेजी समाचार पत्र में सहायक फोटोग्राफर के रूप में काम किया। कहा जाता है कि उस समय की मशहूर अभिनेत्री मधुबाला ने यश की अंग्रेजी बोलने की क्षमता से प्रभावित होकर उनसे फोटो खिंचवाई।


यश ने 1950 के दशक की शुरुआत में शशिधर मुखर्जी के फिल्मिस्तान स्टूडियो में पब्लिसिस्ट और स्टिल फोटोग्राफर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने 'लव इन शिमला' (1960) में प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव के रूप में काम किया और बाद में 1962 में सुनील दत्त की अजंता आर्ट्स से जुड़े।


देव आनंद की नवकेतन फिल्म्स के साथ उनका काम भी महत्वपूर्ण रहा। यहां उन्होंने 'गाइड' (1965), 'ज्वेल थीफ' (1967), 'प्रेम पुजारी' (1970) और 'हरे रामा हरे कृष्णा' (1971) जैसी सफल फिल्मों का प्रोडक्शन किया। 1971 में, जौहर ने मार्शल आर्ट्स स्टार ब्रूस ली और अभिनेता जेम्स कोबर्न के साथ भारत में एक फिल्म के लिए लोकेशन देखने की यात्रा की, जो अंततः नहीं बनी।


1976 में, उन्होंने धर्मा प्रोडक्शंस की स्थापना की, जो अपनी इमोशनल और पारिवारिक फिल्मों के लिए जानी गई। 1980 में, यश जौहर ने 'दोस्ताना' बनाई, जिसमें अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा और जीनत अमान ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही।


इसके बाद 'दुनिया' (1984), 'अग्निपथ' (1990), 'गुमराह' (1993) और 'डुप्लिकेट' (1998) ने धर्मा प्रोडक्शंस की पहचान को और मजबूत किया। 'अग्निपथ' भले ही रिलीज के समय बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन अमिताभ बच्चन का किरदार आज भी भारतीय सिनेमा की क्लासिक मानी जाती है। यश जौहर ने हॉलीवुड फिल्म 'द जंगल बुक' (1994) में एसोसिएट प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया।


1990 के दशक के अंत में, यश जौहर के बेटे करण जौहर ने निर्देशन में कदम रखा। यश ने अपने बेटे की प्रतिभा पर भरोसा जताया। 1998 में आई 'कुछ कुछ होता है' ने भारतीय सिनेमा के इतिहास को बदल दिया। इसके बाद 'कभी खुशी कभी गम' (2001) और 'कल हो ना हो' (2003) जैसी फिल्मों ने एनआरआई दर्शकों के बीच बॉलीवुड की एक नई पहचान बनाई।


यश जौहर को फिल्म उद्योग में एक सज्जन और दयालु व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। वे केवल निर्माता नहीं थे, बल्कि कलाकारों और क्रू के लिए एक संरक्षक की तरह थे। 26 जून 2004 को कैंसर के कारण उनका निधन हो गया। उनके बाद, उनके बेटे करण जौहर और पत्नी हीरू जौहर ने 'धर्मा प्रोडक्शंस' की जिम्मेदारी संभाली। आज, धर्मा प्रोडक्शंस भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और सफल प्रोडक्शन हाउस में से एक है। यश जौहर का सिनेमा के प्रति जुनून और उनके द्वारा स्थापित मूल्य आज भी बॉलीवुड की हर बड़ी फिल्म में दिखाई देते हैं।