यश चोपड़ा: रोमांस के बादशाह की अनकही कहानी
यश चोपड़ा का योगदान
मुंबई, 20 अक्टूबर। यश चोपड़ा हिंदी सिनेमा के उन प्रमुख फिल्म निर्माताओं में से एक रहे हैं, जिन्होंने प्रेम कहानियों को प्रस्तुत करने का एक नया तरीका विकसित किया। उन्हें हिंदी सिनेमा का 'रोमांस का बादशाह' माना जाता था। उनकी पहचान केवल रोमांटिक फिल्मों तक सीमित नहीं थी; उन्होंने गंभीर विषयों पर भी फिल्में बनाई, नए प्रकार के पात्रों को दर्शाया और कई कलाकारों को पहचान दिलाई।
शाहरुख खान के करियर में यश चोपड़ा का योगदान
शाहरुख खान के करियर में यश चोपड़ा की फिल्मों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 'डर' में शाहरुख को एक जुनूनी प्रेमी के रूप में दिखाया गया था, जो प्यार पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था। यह एक साहसिक निर्णय था।
यश चोपड़ा का प्रारंभिक जीवन
यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर 1932 को लाहौर में हुआ, जो अब पाकिस्तान में है। उनका पूरा नाम यश राज चोपड़ा था। बचपन से ही उन्हें फिल्मों में रुचि थी, जिसने उन्हें फिल्म निर्माण की दुनिया में प्रवेश दिलाया। उन्होंने अपने बड़े भाई बी.आर. चोपड़ा के साथ काम करके फिल्म निर्माण की बारीकियों को सीखा। शुरुआत में, वह सहायक के रूप में काम करते थे, जहां उन्होंने कैमरे के पीछे रहकर समझा कि कहानी को पर्दे पर कैसे प्रस्तुत किया जाता है।
फिल्म निर्देशन की शुरुआत
यश चोपड़ा ने 1959 में 'धूल का फूल' से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद 'धर्मपुत्र' और 'वक्त' जैसी फिल्मों ने उन्हें एक गंभीर निर्देशक के रूप में स्थापित किया। 1965 में आई 'वक्त' विशेष रूप से चर्चित रही, जिसमें कई बड़े कलाकार एक साथ नजर आए। इसके बाद 'इत्तेफाक' और 'आदमी और इंसान' जैसी फिल्मों ने भी उन्हें दर्शकों की सराहना दिलाई।
यश राज फिल्म्स की स्थापना
1973 में, यश चोपड़ा ने अपना प्रोडक्शन हाउस यश राज फिल्म्स की स्थापना की। इसी वर्ष आई फिल्म 'दाग' ने उनके नए सफर की शुरुआत की। इसके बाद 'दीवार', 'कभी-कभी', 'त्रिशूल' और 'काला पत्थर' जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान को और मजबूत किया। 'दीवार' में अमिताभ बच्चन का एंग्री यंग मैन वाला किरदार दर्शकों को बहुत पसंद आया।
डर: एक मील का पत्थर
यश चोपड़ा की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक 1993 में रिलीज हुई 'डर' है। इस फिल्म में शाहरुख खान ने राहुल मेहरा का किरदार निभाया, जो एक जुनूनी प्रेमी था। वह किरण, यानी जूही चावला, का पीछा करता है। उस समय शाहरुख को इस तरह के नकारात्मक किरदार में पेश करना एक नया प्रयोग था।
यश चोपड़ा का सम्मान और विरासत
यश चोपड़ा को हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें 2001 का दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और 2005 में पद्म भूषण शामिल हैं। उन्होंने 2012 में अपने 80वें जन्मदिन पर घोषणा की थी कि 'जब तक है जान' उनकी अंतिम फिल्म होगी। इस फिल्म में शाहरुख खान, कटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा मुख्य भूमिकाओं में थे। 21 अक्टूबर 2012 को यश चोपड़ा का निधन हो गया। उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म 13 नवंबर 2012 को रिलीज हुई।