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महेश भट्ट: एक फिल्मकार की कहानी जो भावनाओं को पर्दे पर जीवंत करता है

महेश भट्ट, एक प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में बनाई हैं जो समाज और मानवीय भावनाओं को दर्शाती हैं। उनका जीवन संघर्ष और सफलता की कहानी है, जिसमें उन्होंने अपने अनुभवों को पर्दे पर जीवंत किया। जानें कैसे उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई और उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में भी।
 

महेश भट्ट का फिल्मी सफर



मुंबई, 20 सितंबर (वेब वार्ता)। हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्मकार ऐसे हैं जिन्होंने केवल फिल्में नहीं बनाई, बल्कि अपनी कहानियों के माध्यम से समाज, रिश्तों और मानवीय भावनाओं को पर्दे पर उतारा। महेश भट्ट भी ऐसे ही निर्देशकों में से एक हैं। लगभग पांच दशकों के अपने फिल्मी करियर में, महेश भट्ट ने ‘सारांश’ जैसी गंभीर फिल्में और ‘आशिकी’ जैसी रोमांटिक कहानियाँ प्रस्तुत की हैं, जो दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ गईं।


महेश भट्ट का जन्म 20 सितंबर 1948 को मुंबई में हुआ था। उनका बचपन आसान नहीं था। उनके पिता नानाभाई भट्ट भी फिल्म निर्माता थे, लेकिन उन्होंने महेश की मां शिरीन मोहम्मद अली से शादी नहीं की थी, जिसके कारण महेश को कई तानों का सामना करना पड़ा। आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी, जिससे महेश ने ठान लिया कि वे जीवन में सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचेंगे।


महेश भट्ट का फिल्म इंडस्ट्री में कोई खास संपर्क नहीं था, लेकिन फिल्मों के प्रति उनका जुनून उन्हें महबूब स्टूडियो तक ले गया। उन्होंने स्टूडियो में काम पाने के लिए झूठ बोला कि वे फिल्म निर्देशक राज खोसला को जानते हैं। जब उनसे सच पूछा गया, तो उन्होंने सब कुछ बता दिया। राज खोसला ने उनकी ईमानदारी की सराहना की और उन्हें अपनी टीम में असिस्टेंट बना लिया। यहीं से महेश भट्ट के फिल्मी करियर की शुरुआत हुई।


1974 में महेश भट्ट ने ‘मंजिलें और भी हैं’ फिल्म से निर्देशन की शुरुआत की। उनके शुरुआती काम में व्यक्तिगत अनुभवों और समाज के मुद्दों की झलक दिखाई देने लगी। भट्ट ने ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘नाम’, ‘अवारगी’, और ‘कश्मकश’ जैसी फिल्में बनाई, जो समाज को असली आईना दिखाती हैं। 1984 में आई फिल्म ‘सारांश’ को भी खूब सराहा गया।


महेश भट्ट ने 1990 के दशक में विशेष फिल्म्स नाम से अपना प्रोडक्शन हाउस स्थापित किया। इस बैनर के तहत उन्होंने ‘राज’, ‘मर्डर’, ‘जिस्म’, ‘जन्नत’, और ‘आशिकी 2’ जैसी सफल फिल्मों का निर्माण किया। इन फिल्मों ने न केवल नए कलाकारों को अवसर दिया, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार कमाई की। 1998 की फिल्म ‘जख्म’ ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया। ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘तमन्ना’, और ‘गुड़िया’ जैसी फिल्मों के लिए भी भट्ट ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।


1990 में रिलीज हुई ‘आशिकी’ केवल एक प्रेम कहानी नहीं थी, बल्कि इसका संगीत भी बेहद लोकप्रिय हुआ। इसके बाद महेश भट्ट का नाम उन फिल्मकारों में शामिल हो गया जो गंभीर विषयों के साथ-साथ मनोरंजन को भी प्रभावी ढंग से पर्दे पर पेश कर सकते थे।


महेश भट्ट की फिल्म ‘जख्म’ को उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है। इस फिल्म को राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नरगिस दत्त अवॉर्ड मिला। ‘जख्म’ को उनके निजी अनुभवों से जुड़ी फिल्म के तौर पर भी देखा जाता है।


महेश भट्ट ने दो शादियाँ की हैं। जब वह कॉलेज में थे, तब उन्होंने लोरिएन नाम की एक लड़की से प्यार किया, जो एक अनाथालय में पढ़ती थीं। एक बार महेश ने अनाथालय की दीवार कूदकर उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन पकड़े गए। इसके बाद उन्होंने लोरिएन का वाईडब्ल्यूसीए में दाखिला करवाया। दोनों ने शादी का फैसला किया और लोरिएन ने अपना नाम बदलकर किरण रख लिया। दोनों ने 20 साल की उम्र में शादी की। शादी के एक साल बाद पूजा भट्ट का जन्म हुआ। इस दौरान महेश का नाम परवीन बाबी के साथ भी जुड़ने लगा।


1984 में फिल्म ‘सारांश’ की शूटिंग के दौरान महेश की मुलाकात सोनी राजदान से हुई। जल्द ही दोनों को प्यार हो गया। उस समय महेश अपनी पहली पत्नी किरण के साथ रह रहे थे। बाद में सोनी और महेश ने इस्लाम धर्म अपनाया और 1986 में शादी की। इस जोड़े की दो बेटियाँ हैं, शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट। महेश की पहली पत्नी किरण से दो बच्चे हैं, पूजा और राहुल भट्ट।