मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में उठे विवाद के बाद श्वेता मेनन ने उठाए गंभीर सवाल
कोच्चि में चल रहा विवाद
कोच्चि, 3 जुलाई। मलयालम सिनेमा के कलाकारों का संगठन 'मलयालम मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन' (अम्मा) एक बार फिर आंतरिक विवादों के चलते चर्चा में है। संगठन में नेतृत्व को लेकर चल रहा टकराव अब एक गंभीर संघर्ष में बदल चुका है। पूर्व अध्यक्ष श्वेता मेनन ने हाल ही में गठित एड हॉक कमेटी की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा हालात में उनकी कार्यकारी समिति को जिम्मेदारी संभालने का अधिकार है।
एजीबी बैठक के बाद का घटनाक्रम
यह मामला 21 जून को हुई वार्षिक आम बैठक (एजीबी) के बाद और बढ़ गया, जब भारी विरोध के बीच श्वेता मेनन और उनकी पूरी कार्यकारी समिति ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। यह कदम संगठन में बढ़ते असंतोष और नेतृत्व पर उठ रहे सवालों के बीच उठाया गया था। उस समय यह माना जा रहा था कि यह इस्तीफा संगठन में बड़े बदलाव की शुरुआत है, लेकिन अब यह निर्णय नए विवाद का कारण बन गया है।
नई एड हॉक समिति का गठन
इस्तीफे के बाद एजीबी ने एक 9 सदस्यीय एड हॉक समिति का गठन किया, जिसका उद्देश्य नए चुनाव होने तक संगठन का संचालन करना है। इस समिति की अध्यक्षता रमेश पिशारोडी को सौंपी गई है, जबकि पूर्व विधायक के.बी. गणेश कुमार भी इसके सदस्य हैं। इस निर्णय के बाद संगठन में दो अलग-अलग खेमे बन गए हैं, एक पक्ष नई समिति का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा इसे अवैध मानता है।
श्वेता मेनन का बयान
विवाद तब और बढ़ गया जब एड हॉक समिति ने हाल ही में कोच्चि में एक बैठक की। इस बैठक के बाद, श्वेता मेनन ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने समिति की कार्यप्रणाली और नई समिति की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अम्मा के नियमों के अनुसार, जब तक नई कार्यकारिणी का चुनाव नहीं होता, तब तक पुरानी कार्यकारिणी ही प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालती है। ऐसे में एड हॉक समिति का गठन नियमों के खिलाफ है।
आरोप और जवाब
श्वेता मेनन ने आरोप लगाया कि कुछ सदस्य जानबूझकर संगठन में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं और व्यक्तिगत हितों के लिए दिशा बदलना चाहते हैं। उन्होंने इसे संगठन पर नियंत्रण पाने की कोशिश करार दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि 21 जून की बैठक में 10 से 15 सदस्यों का एक समूह पहले से तैयार प्रस्ताव लेकर आया था, जिसका उद्देश्य उनकी कार्यकारिणी को हटाना था।
श्वेता मेनन ने कहा कि उस प्रस्ताव में लगाए गए आरोप न केवल निराधार थे, बल्कि उसे आवश्यक दो-तिहाई बहुमत भी नहीं मिला। ऐसे में उस प्रस्ताव को वैध नहीं माना जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे चुप नहीं रहेंगी और अपने पक्ष को मजबूती से रखेंगी।