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मकर संक्रांति पर कलाकारों ने साझा की बचपन की यादें और त्योहार का महत्व

इस मकर संक्रांति पर, सन नियो के कलाकारों ने अपने बचपन की यादें साझा की हैं। मेघा रे, भाग्यश्री मिश्रा और गौरी शेलगांवकर ने त्योहार के महत्व को समझाया और बताया कि यह केवल पतंग उड़ाने या मिठाई खाने का अवसर नहीं है, बल्कि परिवार के साथ जुड़ने और सकारात्मकता को अपनाने का समय है। जानें कैसे ये कलाकार इस खास दिन को मनाने की योजना बना रहे हैं।
 

मकर संक्रांति का जश्न: कलाकारों की यादें


मुंबई, 13 जनवरी। सर्दियों की हल्की धूप और आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें मकर संक्रांति के त्योहार की पहचान बन चुकी हैं। इस अवसर पर लोग अपने प्रियजनों के साथ समय बिताते हैं, खुशियों का आदान-प्रदान करते हैं और नए साल के लिए सकारात्मक सोच को अपनाते हैं। इसी संदर्भ में, सन नियो के कलाकारों ने मकर संक्रांति के महत्व को समझाया और अपने बचपन के अनुभव साझा किए।


मेघा रे, जो 'दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी' में दिव्या का किरदार निभा रही हैं, ने कहा, "मकर संक्रांति मेरे लिए हमेशा खास रही है। यह त्योहार केवल मिठाई खाने या पतंग उड़ाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह खुशियों, उम्मीदों और परिवार के साथ जुड़ने का एक महत्वपूर्ण मौका है। मैं अपने परिवार के साथ पतंग उड़ाने और तिल-गुड़ बांटने का आनंद उठाती थी। ये यादें आज भी मेरे दिल में बसी हुई हैं।"


उन्होंने आगे कहा, "इस साल, काम की व्यस्तताओं के बावजूद, मैं सेट पर अपनी टीम के साथ त्योहार मनाने और मिठाइयां बांटने का प्रयास करूंगी। मकर संक्रांति हमें सिखाती है कि नकारात्मकता को छोड़कर विश्वास, कृतज्ञता और खुशी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मेरी तरफ से सभी को रंगों से भरी और खुशहाल मकर संक्रांति की शुभकामनाएं।"


भाग्यश्री मिश्रा, जो 'सत्या साची' में साची की भूमिका निभा रही हैं, ने भी अपने बचपन की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा, "मेरे लिए मकर संक्रांति नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। बचपन में रंगीन पतंगें उड़ाना और कटी हुई पतंगों के पीछे दौड़ना, ये सब यादें आज भी मुझे खुश कर देती हैं।"


उन्होंने कहा, "हालांकि समय के साथ व्यस्तताओं के कारण त्योहार मनाने का मौका कम मिलता है, लेकिन अगर मुझे काम के बीच मौका मिला, तो मैं सेट पर पतंग उड़ाकर अपने सहकर्मियों के साथ खुशी के पल बिताऊंगी। मेरा मानना है कि त्योहार केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन में उमंग और ऊर्जा का संदेश भी लेकर आता है।"


गौरी शेलगांवकर, जो 'बींदणी' में घेवर का किरदार निभा रही हैं, ने मकर संक्रांति को सादगी और अपनापन से जोड़ा। उन्होंने कहा, "यह त्योहार परिवार के साथ समय बिताने, स्वादिष्ट खाना खाने और सीखने का अवसर होता है। बचपन में बड़े मुझे तिल-गुड़ देते थे और कहते थे कि हमेशा मीठा बोलो, सकारात्मक सोचो और खुश रहो।"


उन्होंने आगे कहा, "इस साल मैं सादगी से त्योहार मनाऊंगी, अपने प्रियजनों को फोन करूंगी और उनके प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद दूंगी। अपनी मां के हाथों से बने तिल के लड्डू सेट पर ले जाऊंगी और सबके साथ बाटूंगी। बचपन में पापा के साथ पतंग उड़ाना मेरे लिए खास अनुभव था।"


'दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी' शाम 7:30 बजे, 'सत्या साची' शाम 8:00 बजे और 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' रात 9:00 बजे सन नियो चैनल पर प्रसारित होते हैं।