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भारतीय सिनेमा के महान संगीतकार वनराज भाटिया की पुण्यतिथि: उनकी अनमोल धुनें आज भी जीवित हैं

वनराज भाटिया, भारतीय समानांतर सिनेमा के एक महान संगीतकार, की पुण्यतिथि 7 मई को है। उन्होंने श्याम बेनेगल की फिल्मों में अद्वितीय संगीत दिया और आज भी उनकी धुनें लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। भाटिया का संगीत पारंपरिक और आधुनिकता का अनूठा संगम है। जानें उनके जीवन और करियर के बारे में और कैसे उन्होंने भारतीय सिनेमा में अपनी छाप छोड़ी।
 

वनराज भाटिया: भारतीय समानांतर सिनेमा के संगीत के जादूगर


मुंबई, 6 मई। भारतीय समानांतर सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जो अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला आज भी उतनी ही ताजा और प्रशंसा के योग्य है। इनमें से एक प्रमुख संगीतकार हैं वनराज भाटिया, जो श्याम बेनेगल के प्रिय संगीतकार रहे और जिन्होंने आर्ट सिनेमा को एक नई दिशा दी।


महान संगीतकार वनराज भाटिया की पुण्यतिथि 7 मई को है। श्याम बेनेगल जैसे प्रसिद्ध निर्देशक के पसंदीदा संगीतकार के रूप में भाटिया का योगदान अद्वितीय रहा। उनका संगीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसा हुआ है। उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक संगीत को एक खूबसूरत तरीके से मिलाकर अपनी एक अलग पहचान बनाई।


वनराज भाटिया का जन्म 31 मई 1927 को मुंबई में हुआ। उन्होंने पश्चिमी शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा ली, लेकिन हिंदी सिनेमा में अपनी अनोखी शैली से एक विशेष स्थान बनाया। उनकी पहली फिल्म 1974 में श्याम बेनेगल की 'अंकुर' थी, जिसके बाद दोनों की जोड़ी ने कई सफल फिल्में दीं। श्याम बेनेगल की 'मंथन', 'निशांत', 'भूमिका', 'कलयुग', 'जुनून', 'मंडी' और 'त्रिकाल' में भाटिया का संगीत आज भी याद किया जाता है। 'भूमिका' का गाना “तुम्हारे बिना जी न लगे घर में” आज भी लोगों की जुबान पर है।


उन्होंने बेनेगल की फिल्मों में ऐसा संगीत दिया जो कहानी और माहौल के साथ पूरी तरह से घुलमिल जाता था। गोविंद निहलानी की 'तमस' के लिए उनके संगीत ने उन्हें 1988 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलाया। यह फिल्म भीष्म साहनी के उपन्यास पर आधारित थी और भाटिया के संगीत ने इसे और भी गहराई प्रदान की।


वनराज भाटिया ने कुल 73 फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया, जिनमें 'खामोश', 'मोहन जोशी हाजिर हो', 'अघात', 'परदेस', 'दामिनी' और 'अजूबा' जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्होंने बैकग्राउंड स्कोर में भी उत्कृष्टता दिखाई और प्रीति सागर जैसी गायिका को फिल्म संगीत में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 'जूली' फिल्म का गाना 'माई हार्ट इज बिटिंग' प्रीति सागर की आवाज में बेहद लोकप्रिय हुआ।


संगीत के अलावा, उन्होंने हजारों विज्ञापनों के जिंगल्स भी बनाए। 'भारत एक खोज' और 'तमस' जैसे टीवी सीरियल्स के लिए उनका संगीत भी सराहा गया। उन्होंने आध्यात्मिक एल्बम भी जारी किए, जैसे 'इंडियन मेडिटेशन म्यूजिक', 'भगवद गीता' और 'उपनिषद' पर आधारित कार्य।


साल 2012 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया और 1989 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला। 55 वर्षों के करियर में उन्होंने वेस्टर्न क्लासिकल, हिंदी फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और आध्यात्मिक संगीत के साथ-साथ विज्ञापनों में भी अपनी छाप छोड़ी। 7 मई 2021 को, 93 वर्ष की आयु में, वनराज भाटिया ने इस दुनिया को अलविदा कहा। उनके जीवन का अंतिम चरण कठिनाइयों और आर्थिक संकट में बीता।