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भारतीय संगीत के 'सुल्तान' उस्ताद सुल्तान खान: एक अद्वितीय यात्रा

उस्ताद सुल्तान खान, जिन्हें 'सारंगी का सुल्तान' कहा जाता है, ने भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई। उनका जन्म 1940 में जोधपुर में हुआ और उन्होंने शास्त्रीय संगीत में नई ऊंचाइयों को छुआ। उनकी प्रमुख उपलब्धियों में फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' का गीत 'अलबेला सजन आयो रे' और पॉप एल्बम 'पिया बसंती' शामिल हैं। उन्होंने पश्चिमी संगीत में भी योगदान दिया और उनकी धुनें कई हॉलीवुड फिल्मों में सुनाई दीं। जानें उनके जीवन और संगीत यात्रा के बारे में।
 

भारतीय संगीत का नया चेहरा


नई दिल्ली, 14 अप्रैल। सारंगी की मधुर धुनों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने वाले प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार उस्ताद सुल्तान खान ने भारतीय संगीत को एक नई पहचान दी है। उन्हें 'सारंगी का सुल्तान' कहा जाता है और वे पद्म भूषण से सम्मानित हैं।


उस्ताद सुल्तान खान ने न केवल शास्त्रीय संगीत में नई ऊंचाइयों को छुआ, बल्कि सिनेमा और पॉप संगीत में भी अपनी छाप छोड़ी। उनका जन्म 15 अप्रैल 1940 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था, जहां उन्होंने अपने दादा उस्ताद अजीम खान और पिता उस्ताद गुलाब खान से संगीत की कठोर शिक्षा ली। मात्र 11 वर्ष की आयु में उन्होंने अखिल भारतीय संगीत सम्मेलन में अपना पहला सोलो प्रदर्शन किया।


उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 'गायकी अंग' थी, जिसमें उन्होंने सारंगी पर मानव स्वर की तरह भावपूर्ण गायकी का अनुकरण किया। इससे पहले सारंगी को केवल एक सहायक वाद्य यंत्र माना जाता था, लेकिन उस्ताद ने इसे एक स्वतंत्र और शक्तिशाली वाद्य बना दिया। उनकी सारंगी में ध्रुपद और खयाल की गहराई समाई हुई थी।


उस्ताद सुल्तान खान ने फिल्म संगीत में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1999 में आई फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' का गीत 'अलबेला सजन आयो रे' उन्हें रातोंरात प्रसिद्धि दिलाने वाला बना। उनकी असली सफलता तब आई जब गायिका चित्रा के साथ उनका पॉप एल्बम 'पिया बसंती' रिलीज हुआ, जिसने युवाओं के बीच धूम मचाई। इस एल्बम के लिए उन्हें एमटीवी इंटरनेशनल व्यूअर्स चॉइस अवार्ड से सम्मानित किया गया।


उन्होंने पश्चिमी दुनिया में भी भारतीय संगीत का परचम लहराया। 1970 के दशक में, उन्होंने बीटल्स के सदस्य जॉर्ज हैरिसन के साथ 65 संगीत कार्यक्रम किए। उनकी सारंगी की धुनें ऑस्कर विजेता फिल्म 'गांधी' और 'हीट एंड डस्ट' जैसी हॉलीवुड फिल्मों में भी सुनाई दीं।


2000 के दशक में, उन्होंने तबला वादक जाकिर हुसैन और अन्य के साथ 'तबला बीट साइंस' नामक इलेक्ट्रॉनिक फ्यूजन ग्रुप में काम किया। उन्होंने राग आधारित सारंगी को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक धुनों के साथ खूबसूरती से जोड़ा। इसके अलावा, उन्होंने पॉप आइकन मैडोना के एल्बम के लिए भी सारंगी बजाई।


उस्ताद सुल्तान खान का निधन 27 नवंबर 2011 को हुआ। उनकी विरासत को उनके बेटे साबिर खान आगे बढ़ा रहे हैं, जो शास्त्रीय और समकालीन संगीत को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। साबिर खान ने 'दंगल' और 'जोधा अकबर' जैसी फिल्मों में संगीत दिया है।