भारतीय संगीत के दिग्गज हृदयनाथ मंगेशकर: भक्ति संगीत से लेकर फिल्मी धुनों तक का सफर
हृदयनाथ मंगेशकर का संगीत सफर
मुंबई, 25 अक्टूबर। भारतीय संगीत की दुनिया में हृदयनाथ मंगेशकर एक अद्वितीय संगीतकार के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने भक्ति संगीत, मराठी भावगीत और हिंदी फिल्मों के लिए कई यादगार रचनाएँ कीं। उनकी विशेषता यह है कि उन्होंने संगीत को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। उनके संगीत यात्रा का एक अनूठा पहलू श्रीमद्भगवद्गीता से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने भगवद्गीता के श्लोकों को इस तरह से संगीत में ढाला कि हर दोहेनुमा श्लोक के लिए अलग राग का चयन किया गया। इस प्रयोग ने उन्हें अन्य संगीतकारों से अलग पहचान दिलाई।
हृदयनाथ मंगेशकर का जन्म 26 अक्टूबर 1937 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ। वह प्रसिद्ध संगीतकार और रंगमंच कलाकार दीनानाथ मंगेशकर के पुत्र हैं। उनकी बड़ी बहनों में लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी महान गायिकाएं शामिल हैं। ऐसे संगीत परिवार में जन्म लेने के कारण, उनके चारों ओर हमेशा संगीत का माहौल रहा, लेकिन अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने संगीत की बारीकियों को सीखा और एक अलग शैली विकसित की।
हृदयनाथ ने महान शास्त्रीय गायक उस्ताद अमीर खान से संगीत की शिक्षा ली। प्रारंभिक दिनों में उन्होंने फिल्मों और स्टेज शो में गाने गाए, लेकिन बाद में संगीतकार के रूप में अधिक पहचान बनाई। उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों के साथ-साथ भजन, अभंग और भावगीत जैसी संगीत विधाओं में भी काम किया। यही कारण है कि उनका संगीत सफर केवल फिल्मी गानों तक सीमित नहीं रहा।
उनके करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संतों और कवियों की रचनाओं को संगीत में ढालना रहा है। उन्होंने संत सूरदास के भजन 'निसदिन बरसत नैन हमारे' और मीराबाई के भजन 'बरसे बूंदिया सावन की' को अपनी धुनों में रिकॉर्ड किया। मीराबाई के भजनों पर आधारित उनके एल्बम 'चला वही देश' को भी विशेष पहचान मिली। इसी तरह संत ज्ञानेश्वर के अभंगों की रिकॉर्डिंग के माध्यम से उन्होंने मराठी भक्ति संगीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
हृदयनाथ मंगेशकर के संगीत सफर की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में श्रीमद्भगवद्गीता की रिकॉर्डिंग शामिल है। वह पहले संगीतकार बने जिन्होंने भगवद्गीता के हर श्लोक को अलग राग में स्वरबद्ध किया। इस प्रयोग ने यह दर्शाया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रचनाओं को नए तरीके से प्रस्तुत करने के लिए भी किया जा सकता है।
फिल्मों में भी हृदयनाथ ने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। उनकी खुद की बनाई और निर्मित फिल्म 'लेकिन' के संगीत को विशेष सराहना मिली, जिसके लिए उन्हें बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन का नेशनल फिल्म अवॉर्ड प्राप्त हुआ।
संगीत में उनके योगदान के लिए हृदयनाथ मंगेशकर को 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई अन्य पुरस्कार भी मिले।