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बॉर्डर-2 में सूबेदार संतराम का किरदार निभाने वाले वंश भारद्वाज ने साझा किए अनुभव

फिल्म 'बॉर्डर-2' ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की है, और वंश भारद्वाज ने सूबेदार संतराम का किरदार निभाते हुए अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने इस किरदार के लिए मानसिक और शारीरिक तैयारी की। वंश ने फिल्म की विरासत और अपने किरदार की गहराई पर भी प्रकाश डाला। जानें उनके अनुभव और फिल्म के प्रति उनकी सोच।
 

फिल्म 'बॉर्डर-2' की सफलता और वंश भारद्वाज का अनुभव




मुंबई, 6 फरवरी। 'बॉर्डर-2' ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है, और इसकी कमाई 250 करोड़ रुपये के पार जा चुकी है। इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं के साथ-साथ सहायक कलाकारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।


फिल्म में सूबेदार संतराम का किरदार निभाने वाले वंश आर भारद्वाज ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया है। भले ही उनका किरदार छोटा हो, लेकिन उन्होंने इसे प्रभावशाली तरीके से निभाया है। वंश ने फिल्म और अपने अनुभवों के बारे में चर्चा की।


उन्होंने कहा, "जब मुझे 'बॉर्डर-2' का ऑफर मिला, तो मेरी पहली प्रतिक्रिया अविश्वास थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं इस फिल्म का हिस्सा बनने जा रहा हूं। यह एक अद्भुत अनुभव था। जब मुझे पता चला कि शूटिंग का समय कम होगा, तो मेरी खुशी और बढ़ गई।"


अपने किरदार के बारे में बात करते हुए वंश ने कहा, "पहली फिल्म की विरासत बहुत बड़ी है। मैंने सुना है कि मूल 'बॉर्डर' देखने के बाद कई लोग सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित हुए थे। मुझे उम्मीद है कि यह फिल्म उस विरासत को आगे बढ़ाएगी। यह एक बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि हम उन लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो हमारे देश की रक्षा करते हैं।"


उन्होंने अपने किरदार की विशेषताओं के बारे में बताया, "मेरा किरदार शांत और विचारशील है। वह गीता पढ़ता है, जो उसकी मां ने उसे दी थी। गीता पढ़ने से जीवन की समझ बेहतर होती है और संयम का महत्व समझ में आता है। यही शांति मेरे किरदार की पहचान है।"


बॉर्डर-2 में अपने किरदार के लिए विशेष तैयारियों के बारे में वंश ने कहा, "फिटनेस मेरे जीवन का एक अहम हिस्सा है। बचपन से ही एक खिलाड़ी होने के नाते, मेरी दिनचर्या इसी पर आधारित रही है। असली चुनौती एक सैनिक की मानसिकता को समझना था।"


उन्होंने आगे कहा, "सैनिक इस सोच के साथ जीते हैं कि उन्हें देश के लिए लड़ने का मौका मिल सकता है। उस मानसिकता को किरदार में उतारना सबसे चुनौतीपूर्ण था।" वंश ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी और उन्होंने कहा, "थिएटर और फिल्म में कोई भेद नहीं है। मैं एक अभिनेता हूं, चाहे माध्यम कोई भी हो।"