बॉब क्रिस्टो: हिंदी सिनेमा के खतरनाक विलेन की अनकही कहानी
बॉब क्रिस्टो का परिचय
मुंबई, 19 मार्च। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के 80 और 90 के दशक में, नायक की ताकत के साथ-साथ खलनायक की भी एक खास पहचान होती थी। इस दौर में एक विदेशी चेहरा बार-बार नजर आता था, जो अपनी शक्ति और डरावने अंदाज से दर्शकों को प्रभावित करता था। वह अभिनेता थे बॉब क्रिस्टो, जो बड़े सितारों के साथ अद्भुत लड़ाई के दृश्य पेश करते थे। खासकर, अमिताभ बच्चन के साथ उनकी लड़ाई के दृश्य आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
बॉब क्रिस्टो का प्रारंभिक जीवन
बॉब क्रिस्टो का जन्म 20 मार्च 1938 को सिडनी में हुआ, और उनका असली नाम रॉबर्ट जॉन क्रिस्टो था। वह एक शिक्षित सिविल इंजीनियर थे, जिनका परिवार ग्रीक और जर्मन मूल का था। बचपन में, वह जर्मनी चले गए, जहां उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ थिएटर में भी भाग लिया। वहां उनकी मुलाकात हेल्गा नाम की एक लड़की से हुई, जिनसे उन्होंने विवाह किया और तीन बच्चों के पिता बने। लेकिन, एक सड़क दुर्घटना में उनकी पत्नी की मृत्यु ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।
परवीन बाबी से मुलाकात
उनकी जिंदगी में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने एक मैगजीन के कवर पर परवीन बाबी की तस्वीर देखी। इस तस्वीर ने उन्हें इतना प्रेरित किया कि वह सब कुछ छोड़कर भारत आ गए। मुंबई पहुंचकर, उन्होंने परवीन बाबी को खोजा और उनसे मिले, जो उनके लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
फिल्मी करियर की शुरुआत
परवीन बाबी की सहायता से, उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का मौका मिला। संजय खान ने 1980 में आई फिल्म 'अब्दुल्ला' में उन्हें पहला बड़ा रोल दिया। इसके बाद, बॉब क्रिस्टो ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 80-90 के दशक में बॉलीवुड के सबसे प्रसिद्ध विदेशी खलनायक बन गए। उन्होंने 'कालिया', 'नमक हलाल', 'मर्द' और 'मिस्टर इंडिया' जैसी फिल्मों में काम किया।
बॉब क्रिस्टो की पहचान
इन फिल्मों में उनकी पहचान उनके एक्शन सीन के लिए थी। खासकर, अमिताभ बच्चन के साथ उनकी भिड़ंत दर्शकों को बहुत पसंद आती थी। जब भी बड़े पर्दे पर अमिताभ और बॉब आमने-सामने होते थे, थिएटर में सीटियां और तालियां गूंज उठती थीं। उनकी लंबी कद-काठी और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस उन्हें अन्य खलनायकों से अलग बनाती थी।
अंतिम दिन
बॉब क्रिस्टो ने लगभग 200 फिल्मों में काम किया, न केवल हिंदी सिनेमा में, बल्कि साउथ सिनेमा में भी अपनी छाप छोड़ी। फिल्मों से दूर होने के बाद, उन्होंने बेंगलुरु में जाकर योगा इंस्ट्रक्टर के रूप में नई जिंदगी शुरू की। धीरे-धीरे, वह फिल्म इंडस्ट्री से दूर होते गए और एक साधारण जीवन जीने लगे। 20 मार्च 2011 को, 72 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।