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बिल्डर कंपनी के खिलाफ अदालत का कड़ा फैसला: क्या है मामला?

महानगर अपर सेशन न्यायाधीश ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसमें बिल्डर को विला का कब्जा न सौंपने और बकाया राशि का भुगतान न करने पर कड़ी कार्रवाई की गई है। यह निर्णय रियल एस्टेट क्षेत्र में कानूनी आदेशों के पालन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के आदेशों के पीछे की कहानी।
 

महानगर अपर सेशन न्यायाधीश का महत्वपूर्ण आदेश


महानगर अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-2 ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने लोक अदालत के आदेशों का पालन न करने पर कार्रवाई की है।


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यह निर्णय न्यायाधीश प्रमोद बंसल की अदालत ने एक्जिक्यूशन पिटीशन के निस्तारण के दौरान सुनाया। यह मामला परिवादी विमला बापना द्वारा दायर याचिका पर आधारित था।


परिवादी की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी और अन्य वकीलों ने अदालत में यह तर्क प्रस्तुत किया कि बिल्डर ने काफी समय बीत जाने के बावजूद न तो विला का कब्जा सौंपा और न ही बकाया राशि का भुगतान किया। अधिवक्ता ने बताया कि परिवादी ने अप्रैल 2017 में विला के लिए कुल 37.21 लाख रुपए का भुगतान किया था।


इससे पहले, स्थायी लोक अदालत ने 6 नवंबर 2020 को परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसमें बिल्डर को निर्देश दिया गया था कि वह विला को सही स्थिति में तैयार कर परिवादी को सौंपे।


हालांकि, आदेशों का पालन न होने और स्थिति में सुधार न होने के कारण अदालत ने अब बिल्डर के खिलाफ नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।


इस फैसले को रियल एस्टेट क्षेत्र में कानूनी आदेशों के पालन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उन मामलों में जहां खरीदारों के अधिकार लंबे समय तक अनदेखे रहते हैं।