×

प्रेम चोपड़ा: बॉलीवुड के खलनायक की अनकही कहानी

प्रेम चोपड़ा, बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता, ने अपने करियर में हीरो और खलनायक दोनों की भूमिकाएं निभाईं। उनकी यात्रा पंजाबी फिल्मों से शुरू होकर हिंदी सिनेमा में एक प्रसिद्ध खलनायक बनने तक फैली है। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ और पर्दे के पीछे का सच।
 

प्रेम चोपड़ा का सफर

मुंबई, 22 सितंबर। सिनेमा की दुनिया में कदम रखने वाले अधिकांश कलाकार हीरो बनने का सपना देखते हैं, लेकिन कई बार किस्मत उन्हें एक अलग पहचान देती है। बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता प्रेम चोपड़ा भी ऐसे ही एक कलाकार हैं, जिन्होंने अपने लंबे करियर में हीरो और विलेन दोनों की भूमिकाएं निभाईं। हालांकि, उन्हें दर्शकों के बीच सबसे अधिक पहचान एक खलनायक के रूप में मिली।


शुरुआत और पहचान

कम ही लोग जानते हैं कि प्रेम चोपड़ा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत पंजाबी फिल्मों में एक हीरो के रूप में की थी। बाद में हिंदी सिनेमा में नकारात्मक भूमिकाएं निभाकर उन्होंने ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम बॉलीवुड के सबसे चर्चित खलनायकों में शामिल हो गया। अपनी अदाकारी और अनोखे अंदाज के कारण प्रेम चोपड़ा ने दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया और भारतीय सिनेमा में एक विशेष स्थान हासिल किया।


प्रेम चोपड़ा का प्रारंभिक जीवन

23 सितंबर 1935 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में जन्मे प्रेम चोपड़ा के पिता रणबीर लाल चोपड़ा एक कंपनी में अकाउंट ऑफिसर थे, जबकि उनकी माता रूपरानी चोपड़ा गृहिणी थीं। भारत विभाजन के बाद उनका पूरा परिवार शिमला आ गया, जहां उन्होंने अपना प्रारंभिक जीवन बिताया।


मुंबई की ओर रुख

प्रेम चोपड़ा ने अपनी स्कूली और कॉलेज की शिक्षा शिमला में पूरी की और हीरो बनने की ख्वाहिश में मुंबई का रुख किया। हालांकि, उनका सफर आसान नहीं था। अपने खर्च चलाने के लिए उन्होंने एक कंपनी में सर्कुलेशन विभाग में काम किया। एक दिन, लोकल ट्रेन में यात्रा करते समय उनकी मुलाकात एक पंजाबी फिल्म के निर्माता से हुई।


फिल्मी करियर की शुरुआत

उस व्यक्ति ने प्रेम चोपड़ा के व्यक्तित्व को देखकर पूछा कि क्या वे फिल्मों में काम करना चाहेंगे। उन्होंने तुरंत हां कर दी और उस व्यक्ति के साथ रंजीत स्टूडियो गए, जहां उन्हें 1960 की सुपरहिट पंजाबी फिल्म 'चौधरी करनैल सिंह' में काम करने का मौका मिला।


बॉलीवुड में पहचान

यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और इसे पंजाबी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। कुछ पंजाबी फिल्मों के बाद जब उन्हें हिंदी फिल्में मिलीं, तो जिन फिल्मों में वह हीरो बने, वे ज्यादातर फ्लॉप रहीं। 'शहीद' (1965) में सुखदेव का किरदार निभाने के बाद उनके लिए बॉलीवुड के दरवाजे खुल गए और वे हिंदी सिनेमा के जाने-माने खलनायक बन गए।


प्रेम चोपड़ा का व्यक्तित्व

फिल्म 'बॉबी' में उनका प्रसिद्ध संवाद 'प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा' भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार डायलॉग्स में से एक है। पर्दे पर खूंखार विलेन का किरदार निभाने वाले प्रेम चोपड़ा असल जिंदगी में बेहद शांत, सरल और विनम्र व्यक्ति हैं। एक समय था जब लोग उन्हें पर्दे पर देखकर असल जिंदगी में भी उनसे डरने लगे थे।