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प्रीति जिंटा ने 90 के दशक के बॉलीवुड में बदलावों पर की चर्चा, जानें क्या कहा!

प्रीति जिंटा ने अपने करियर के शुरुआती दिनों और बॉलीवुड में आए बदलावों पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि कैसे 90 के दशक में हिंदी सिनेमा में परिवर्तन शुरू हुआ और आज भी कलाकारों पर अच्छा काम करने का दबाव बना हुआ है। जानें उनके अनुभव और सिनेमा के विकास के बारे में।
 

बॉलीवुड में प्रीति जिंटा का सफर

मुंबई, 9 सितंबर। अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने जब 90 के दशक के अंत में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा, तब बॉलीवुड का माहौल आज की तुलना में काफी भिन्न था। उस समय के कैमरे, शूटिंग की तकनीक और कलाकारों की तैयारी का तरीका सब कुछ अलग था। अपने 28 साल के करियर में प्रीति ने न केवल कई बदलाव देखे, बल्कि खुद भी उन परिवर्तनों का हिस्सा बनीं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी।


सिनेमा में आए परिवर्तनों और अपने लंबे सफर के बारे में बात करते हुए प्रीति ने बताया कि एक चीज आज भी वैसी ही है, और वह है कलाकारों पर अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव।


एक विशेष बातचीत में प्रीति ने अपने करियर के प्रारंभिक दिनों को याद करते हुए कहा, ''मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे 90 के दशक के अंत में फिल्मों में आने का अवसर मिला। उस समय हिंदी सिनेमा में बदलाव की लहर चल रही थी। फिल्म 'क्या कहना' ने एक नया अनुभव दिया। इसकी कहानी उस समय के लिए अनोखी थी और एक नई अभिनेत्री के रूप में इसमें काम करना मेरे लिए बहुत खास था।''


उन्होंने आगे कहा, ''मेरे इंडस्ट्री में आने से पहले भी ऐसी कहानियों पर फिल्में बनी थीं, लेकिन मेरे लिए ऐसी फिल्म से शुरुआत करना एक अलग अनुभव था। इसके कुछ समय बाद 'दिल चाहता है' आई, जिसने फिल्म निर्माण के तरीके में बड़ा बदलाव लाया। इस फिल्म में लाइव साउंड का उपयोग किया गया, जिससे डबिंग की आवश्यकता खत्म हो गई।''


प्रीति ने कहा, ''मैं उस परिवर्तन के समय का हिस्सा थी। मेरे शुरुआती दिनों से लेकर अब तक, फिल्म निर्माण में सबसे बड़ा बदलाव तकनीक का है। पहले फिल्में फिल्म कैमरों से शूट होती थीं, लेकिन अब डिजिटल कैमरे ने उनकी जगह ले ली है। इसके अलावा, फिल्म को संपादित करने के कई तरीके भी विकसित हुए हैं, जो पहले नहीं थे। लेकिन एक चीज जो आज भी नहीं बदली है, वह है कलाकारों पर अच्छा काम करने का दबाव।''


उन्होंने बताया कि उनके शुरुआती दिनों में विदेश में रहने वाले भारतीयों की प्रेम कहानियों पर आधारित फिल्में काफी लोकप्रिय थीं। उस समय कई फिल्में भारतीय परिवारों और विदेश की पृष्ठभूमि के बीच घूमती थीं। अब फिल्मों का ध्यान धीरे-धीरे भारत से जुड़ी कहानियों की ओर बढ़ रहा है। आज भारतीयता, देश का इतिहास और सेना जैसे विषयों पर फिल्में बन रही हैं। कॉमेडी फिल्मों का अंदाज भी बदल गया है।