परेश रावल: थिएटर से लेकर बॉलीवुड तक का सफर, जानें कैसे बने भारतीय सिनेमा के दिग्गज!
परेश रावल का अद्भुत सफर
मुंबई, 29 मई। भारतीय सिनेमा के मशहूर अभिनेता परेश रावल ने अपनी अदाकारी और कॉमिक टाइमिंग से लाखों दर्शकों का दिल जीता है। लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते कि वह बचपन में बिना टिकट थिएटर में जाकर नाटक देखा करते थे। आज उनकी फिल्मों के लिए दर्शक खुशी-खुशी टिकट खरीदते हैं।
परेश रावल का जन्म 30 मई 1955 को मुंबई में एक गुजराती परिवार में हुआ। उनका बचपन पार्ले ईस्ट में बीता, जहां एक ओपन थिएटर था, जिसने उनके अंदर अभिनय की रुचि जगाई। वह पढ़ाई के साथ-साथ शरारती भी थे, लेकिन थिएटर के प्रति उनका जुनून अद्वितीय था। केवल 9 साल की उम्र में, वह बिना टिकट नाटक देखने चले जाते थे। कई बार उन्हें बाहर निकाल दिया जाता था, लेकिन उनकी लगन कभी कम नहीं हुई।
एक बार जब वह बार-बार थिएटर में घुसने की कोशिश करते पकड़े गए, तो थिएटर के कर्मचारियों ने उनकी दीवानगी को समझा और उन्हें नाटक देखने की अनुमति दी। धीरे-धीरे उन्हें छोटे-छोटे रोल भी मिलने लगे, जो उनके करियर की शुरुआत बनी।
परेश ने अपने करियर की शुरुआत 1984 में फिल्म 'होली' से की और फिर 1985 में 'अर्जुन' जैसी फिल्मों में छोटे रोल निभाए। असली पहचान उन्हें 1986 की फिल्म 'नाम' से मिली, जिसने उन्हें दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उन्होंने 80 और 90 के दशक में लगभग 100 से अधिक फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभाईं, जिनमें 'राम लखन', 'मोहरा', 'क्रांतिवीर' और 'दामिनी' शामिल हैं।
परेश रावल ने न केवल खलनायक बल्कि कई गंभीर और कॉमिक किरदार भी निभाए। 2000 में आई फिल्म 'हेरा फेरी' ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। इस फिल्म में उनका किरदार 'बाबूराव गणपत आप्टे' आज भी भारतीय कॉमेडी सिनेमा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसके बाद उन्होंने 'हंगामा', 'गरम मसाला', 'भूल भुलैया', 'वेलकम', 'गोलमाल' सीरीज और 'ओह माय गॉड' जैसी फिल्मों में शानदार प्रदर्शन किया। उनके काम को कई पुरस्कारों से नवाजा गया, जिसमें दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक बार फिल्मफेयर अवार्ड शामिल हैं। 2014 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
पर्सनल लाइफ में, परेश रावल ने अभिनेत्री स्वरूप संपत से शादी की, जो मिस इंडिया रह चुकी हैं। उनकी प्रेम कहानी कॉलेज के दिनों से शुरू होकर शादी तक पहुंची।
परेश ने राजनीति में भी कदम रखा और 2014 में अहमदाबाद पूर्व से सांसद बने। इसके साथ ही, उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का प्रमुख भी बनाया गया।