☰
×

पद्मिनी कोल्हापुरे: आशा भोसले की मदद से मिली पहली फिल्म, जानें उनकी अनकही कहानी

पद्मिनी कोल्हापुरे, एक प्रसिद्ध हिंदी फिल्म अभिनेत्री, ने बचपन में ही अभिनय की दुनिया में कदम रखा। आशा भोसले की मदद से उन्हें पहली फिल्म मिली, और उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ और उनके करियर की उपलब्धियाँ।
 

पद्मिनी कोल्हापुरे का फिल्मी सफर




मुंबई, 31 अक्टूबर। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने बचपन में ही अभिनय की दुनिया में कदम रखा और बड़े होकर अपनी पहचान बनाई। पद्मिनी कोल्हापुरे भी इनमें से एक हैं। उन्होंने बहुत कम उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू किया और एक बाल कलाकार से लेकर एक प्रमुख अभिनेत्री बन गईं।


उनकी यादगार फिल्मों में 'सत्यम शिवम सुंदरम', 'इंसाफ का तराजू' और 'प्रेम रोग' शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि फिल्मों में आने से पहले, पद्मिनी अपनी बहन के साथ कोरस गाने का काम करती थीं। उनकी पहली फिल्म की कहानी भी खास है, जिसमें प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले की महत्वपूर्ण भूमिका थी।


पद्मिनी का जन्म 1 नवंबर 1965 को मुंबई में हुआ। उनके पिता पंडित पंढरीनाथ कोल्हापुरे शास्त्रीय संगीत से जुड़े थे, जबकि उनकी मां अनुपमा एयरलाइन में कार्यरत थीं। उनका परिवार हमेशा से कला और संगीत से जुड़ा रहा है। उनकी बहन शिवांगी कोल्हापुरे भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। शिवांगी की शादी अभिनेता शक्ति कपूर से हुई है, और उनकी बेटी श्रद्धा कपूर आज बॉलीवुड की एक प्रमुख अभिनेत्री हैं। इस प्रकार, पद्मिनी का संबंध कपूर परिवार से भी है।


पद्मिनी को बचपन से ही गाने और नृत्य का शौक था। उन्होंने केवल सात साल की उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू किया। शुरुआत में, वह अपनी बहन के साथ कई फिल्मों के गानों में कोरस गाती थीं। 'यादों की बारात', 'किताब' और 'दुश्मन दोस्त' जैसी फिल्मों में उनकी आवाज सुनाई दी। इसी दौरान उनकी मुलाकात आशा भोसले से हुई, जो रिश्ते में उनकी बुआ थीं।


पद्मिनी ने एक इंटरव्यू में बताया कि आशा भोसले ने उन्हें अभिनेता देव आनंद से मिलवाया था। आशा ने देव से कहा था कि अगर उनके पास पद्मिनी के लिए कोई काम हो तो उन्हें मौका दें। इस मुलाकात के बाद देव आनंद ने उन्हें अपनी फिल्म 'इश्क इश्क इश्क' में काम दिया, जिससे उन्हें पहली फिल्म मिली। उस समय वह बहुत छोटी थीं और उन्हें नहीं पता था कि वह आगे चलकर हिंदी सिनेमा की एक प्रमुख अभिनेत्री बनेंगी।


इसके बाद, पद्मिनी ने 'जिंदगी', 'ड्रीम गर्ल' और 'सत्यम शिवम सुंदरम' जैसी फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया। राज कपूर की फिल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' में उन्होंने छोटी रूपा का किरदार निभाया, जिससे उन्हें पहचान मिली। राज कपूर ने उन्हें फिल्म 'प्रेम रोग' में मुख्य भूमिका भी दी, जिसमें उन्होंने ऋषि कपूर के साथ काम किया।


1980 में आई फिल्म 'इंसाफ का तराजू' में उनके प्रदर्शन की काफी सराहना हुई, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का पुरस्कार मिला। उस समय उनकी उम्र केवल 15 साल थी। इसके बाद, 1982 में 'प्रेम रोग' के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार मिला। इतनी कम उम्र में लगातार दो बड़े पुरस्कार प्राप्त करना उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि थी।


पद्मिनी ने 'आहिस्ता आहिस्ता', 'विधाता', 'वो सात दिन', 'प्यार झुकता नहीं', 'सौतन', 'स्वर्ग से सुंदर' और 'प्यार के काबिल' जैसी फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने हिंदी फिल्मों के साथ-साथ मराठी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। कुछ समय के लिए फिल्मों से दूर रहने के बाद, उन्होंने 'चिमनी पाखर', 'फटा पोस्टर निकला हीरो', 'पानीपत' और 'प्रवास' जैसी फिल्मों में वापसी की।


निजी जीवन की बात करें तो, पद्मिनी ने 1986 में फिल्म निर्माता प्रदीप शर्मा से विवाह किया। उनके एक बेटे प्रियंक शर्मा हैं, जो अभिनय और फिल्म निर्माण में सक्रिय हैं।