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पंजाबी सिनेमा के 'अमिताभ बच्चन' सतीश कौल: संघर्ष और पहचान की कहानी

सतीश कौल, जिन्हें पंजाबी सिनेमा का 'अमिताभ बच्चन' कहा जाता था, ने अपने करियर में कई सफल फिल्में दीं। लेकिन उनके जीवन का अंतिम चरण संघर्ष और दर्द से भरा रहा। जानिए उनकी कहानी, जो सफलता से लेकर लाचारी तक फैली हुई है।
 

सतीश कौल का जीवन और करियर




मुंबई, 9 अप्रैल। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में एक समय सतीश कौल का नाम सुपरस्टार के रूप में लिया जाता था। दर्शक उन्हें प्यार से 'पंजाबी सिनेमा का अमिताभ बच्चन' कहते थे। उन्होंने 'महाभारत' धारावाहिक में इंद्रदेव का किरदार निभाकर देशभर में पहचान बनाई। हालांकि, उनकी शोहरत के बावजूद, उनके जीवन का अंतिम चरण बेहद कठिन और संघर्षपूर्ण रहा।


8 सितंबर 1946 को कश्मीर में जन्मे सतीश कौल की कहानी सफलता, प्रसिद्धि और अंत में आई कठिनाइयों की है। उनके पिता मोहन लाल कौल एक प्रसिद्ध कश्मीरी कवि थे। श्रीनगर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने अभिनय का सपना देखा और पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लिया। वहां उनकी सहपाठी में डैनी डेन्जोंगपा, जया बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कलाकार शामिल थे।


1970 के दशक में सतीश कौल ने पंजाबी फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत की। उनकी रोमांटिक और भावनात्मक भूमिकाओं ने उन्हें पंजाबी सिनेमा का प्रिय बना दिया। उन्होंने 'सस्सी पुन्नू', 'इश्क निमाना', 'सुहाग चूड़ा', 'पटोला', 'आजादी', 'शेरा दे पुत्त शेर', 'मौला जट्ट' और 'पींगा प्यार दीयां' जैसी फिल्मों में बेहतरीन अभिनय किया। चार दशकों से अधिक के करियर में, उन्होंने लगभग 300 फिल्मों में काम किया और पंजाबी दर्शकों के दिलों पर राज किया।


सतीश कौल ने हिंदी सिनेमा में भी अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन उन्हें उतनी सफलता नहीं मिली। उन्होंने 'वारंट', 'कर्मा', 'आग ही आग', 'कमांडो', 'राम लखन' और 'प्यार तो होना ही था' जैसी फिल्मों में काम किया।


उनके करियर के लिए बी.आर. चोपड़ा का धार्मिक टीवी शो 'महाभारत' वरदान साबित हुआ। इस धारावाहिक में इंद्रदेव के किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। इसके अलावा, उन्होंने 'विक्रम और बेताल' और शाहरुख खान के साथ 'सर्कस' जैसे टीवी शो में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।


शाहरुख खान ने एक बार कहा था कि उन्होंने सबसे पहले सतीश कौल की फिल्म की शूटिंग देखी थी, जो उन्हें बहुत पसंद आई और यह उनके अभिनय में आने की प्रेरणा बनी।


सतीश कौल के योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें 2011 में पीटीसी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। लेकिन उनके निजी जीवन में कई दुख आए। शादी के कुछ साल बाद उनका तलाक हो गया और पत्नी बेटे के साथ अलग हो गई। 2011 में, वह मुंबई छोड़कर लुधियाना चले गए और वहां एक अभिनय स्कूल खोला, लेकिन वह घाटे में चला गया।


2015 में, दुर्भाग्यवश उनका कूल्हा टूट गया, जिसके बाद वह ढाई साल तक बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए। उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती गई और उन्हें अपना घर बेचना पड़ा।


अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने के दौरान, उन्होंने अपनी पीड़ा साझा की और कहा कि अब वे पूरी तरह लाचार हैं। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से मदद की अपील की, लेकिन कई वादों के बावजूद कोई मदद नहीं मिली। अंततः, 10 अप्रैल 2021 को 74 वर्ष की आयु में सतीश कौल का निधन हो गया।