निशिकांत कामत: एक अद्वितीय फिल्मकार की कहानी जो हमेशा रहेगी याद
निशिकांत कामत का फिल्मी सफर
मुंबई, 6 जून। हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले निर्देशक और अभिनेता निशिकांत कामत को उन फिल्म निर्माताओं में गिना जाता है जिन्होंने कम समय में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। 'दृश्यम', 'मदारी', 'मुंबई मेरी जान' और 'फोर्स' जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान दिलाया। उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ-साथ समाज की सच्चाइयों और आम लोगों की भावनाओं को भी दर्शाया गया।
निशिकांत कामत का जन्म 17 जून 1970 को महाराष्ट्र के दादर में हुआ। बचपन से ही उन्हें फिल्मों का गहरा शौक था और वह अमिताभ बच्चन के बड़े प्रशंसक रहे। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि थिएटर की ओर बढ़ी, और एक नाटक की रिहर्सल देखने के दौरान उन्हें मंच पर खड़े होने का अवसर मिला, जिससे उनका थिएटर का सफर शुरू हुआ।
थिएटर में काम करते हुए उनका झुकाव फिल्म निर्माण की ओर बढ़ा। उन्होंने दूरदर्शन के एक मराठी धारावाहिक में सहायक के रूप में काम किया, जहां उन्हें संपादन का अनुभव मिला। महज 22 साल की उम्र में वह एक संपादक बन गए। 24 साल की उम्र में उन्हें निर्देशन का अवसर मिला, जिससे उनकी नई पहचान बनने लगी। बाद में उन्होंने टीवी छोड़कर लेखन की दिशा में कदम बढ़ाया और कई सालों तक स्क्रिप्ट लेखन का कार्य किया।
साल 2005 में उनका सपना साकार हुआ जब उन्होंने मराठी फिल्म 'डोम्बीवली फास्ट' का निर्देशन किया, जो उस वर्ष की सबसे सफल मराठी फिल्मों में से एक बनी। इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से भरपूर सराहना मिली और इसे सर्वश्रेष्ठ मराठी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।
मराठी सिनेमा में सफलता के बाद, उन्होंने हिंदी फिल्मों की ओर रुख किया। 2008 में उनकी फिल्म 'मुंबई मेरी जान' रिलीज हुई, जिसने 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों के प्रभाव को संवेदनशीलता से दर्शाया। इसके बाद उन्होंने 'फोर्स', 'दृश्यम', 'रॉकी हैंडसम' और 'मदारी' जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया। विशेष रूप से 'दृश्यम' ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
निशिकांत केवल एक निर्देशक नहीं थे, बल्कि एक प्रतिभाशाली अभिनेता भी थे। उन्होंने '404', 'रॉकी हैंडसम', 'डैडी', 'जूली 2' और 'भावेश जोशी' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। 'रॉकी हैंडसम' में उनके द्वारा निभाए गए खलनायक के किरदार को भी दर्शकों ने सराहा।
हालांकि, कामयाबी के बावजूद उनके दिल में एक अधूरा सपना था - वह अमिताभ बच्चन को निर्देशित करना चाहते थे। बचपन से जिनकी फिल्मों को देखकर उन्होंने सिनेमा को समझा, उनके साथ काम करने की इच्छा उनके मन में हमेशा बनी रही। लेकिन किस्मत ने उन्हें यह अवसर नहीं दिया।
17 अगस्त 2020 को निशिकांत कामत का निधन हो गया। वह लंबे समय से लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और 50 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली।