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निरूपा रॉय: हिंदी सिनेमा की सबसे प्रिय मां का अनकहा सफर

निरूपा रॉय, हिंदी सिनेमा की सबसे प्रिय मां, का सफर अद्वितीय रहा है। शादी से पहले कभी फिल्म नहीं देखने वाली निरूपा ने 'दीवार' जैसी फिल्मों में मां का किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। उनके करियर की शुरुआत और धार्मिक फिल्मों में उनके योगदान के साथ-साथ उनकी पहचान के विभिन्न पहलुओं पर एक नजर। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ और उनके योगदान को।
 

निरूपा रॉय का अद्वितीय सफर

मुंबई, 12 अक्टूबर। जब भी हिंदी सिनेमा में मां के किरदारों की चर्चा होती है, तो निरूपा रॉय का नाम सबसे पहले आता है। फिल्म 'दीवार' में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की मां का किरदार निभाना आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है।


यह जानकर आश्चर्य होता है कि इस प्रतिष्ठित अभिनेत्री ने शादी से पहले कभी भी कोई फिल्म नहीं देखी थी। हालांकि, उन्होंने देवी पार्वती और अमिताभ बच्चन की मां का किरदार निभाकर अपनी एक अलग पहचान बना ली।


निरूपा रॉय का जन्म 4 जनवरी 1931 को गुजरात के वलसाड में हुआ था। उनका असली नाम कोकिला किशोरचंद्र बलसारा था, और उनके परिवार का सिनेमा से कोई खास संबंध नहीं था।


उन्होंने 1983 में एक साक्षात्कार में बताया था कि उनके माता-पिता सिनेमा को पसंद नहीं करते थे, जिससे वह कभी भी फिल्मों में आने का विचार नहीं कर पाईं।


कम उम्र में उनकी शादी कमल रॉय से हुई, जिसके बाद वह मुंबई आ गईं। उनके पति फिल्मों में करियर बनाना चाहते थे। इसी दौरान एक गुजराती अखबार में कलाकारों की जरूरत का विज्ञापन आया, जिसमें दोनों ने भाग लेने का निर्णय लिया। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में काम करने का मौका निरूपा को मिला।


1946 में, उन्होंने गुजराती फिल्म 'राणकदेवी' में अपनी पहली उपस्थिति दर्ज की, और उसी वर्ष हिंदी फिल्म 'अमर राज' में भी काम किया।


निरूपा रॉय के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ 1950 में आया, जब उन्होंने फिल्म 'हर हर महादेव' में माता पार्वती का किरदार निभाया। दर्शकों ने उनके अभिनय को इतना सराहा कि कई लोग उन्हें देवी मानने लगे।


हालांकि, निरूपा रॉय की पहचान केवल धार्मिक फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए। 1975 में आई फिल्म 'दीवार' ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। फिल्म का प्रसिद्ध डायलॉग 'मेरे पास मां है' आज भी याद किया जाता है।


इसके बाद, उन्होंने 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'अमर अकबर एंथनी', 'सुहाग' और 'मर्द' जैसी फिल्मों में भी मां का किरदार निभाया।


अपने करियर में उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया और कई पुरस्कार भी जीते। निरूपा रॉय को 2004 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। दुर्भाग्यवश, उसी वर्ष 13 अक्टूबर को उनका निधन हो गया।