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निमृत कौर ने साझा की अपने पिता की दर्दनाक कहानी, कैसे बदली जिंदगी?

बॉलीवुड अभिनेत्री निमृत कौर ने अपने पिता मेजर भूपिंदर सिंह की हत्या की दर्दनाक कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि कैसे इस घटना ने उनके परिवार की जिंदगी को प्रभावित किया। निमृत ने अपने पिता को आखिरी बार घर से काम पर जाते हुए देखा था और उसके बाद वह आतंकवादियों के हाथों मारे गए। इस लेख में जानें कि कैसे इस त्रासदी ने उनके जीवन को बदल दिया और उनके परिवार पर इसका क्या असर पड़ा।
 

पिता की यादों में बसी है एक दर्दनाक कहानी

बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा निमृत कौर ने अपने बचपन में अपने पिता मेजर भूपिंदर सिंह को खो दिया था। उस समय उनकी उम्र केवल 12 वर्ष थी। उनके पिता भारतीय सेना में एक अधिकारी थे, जिन्हें आतंकवादियों ने अगवा करने के बाद हत्या कर दिया। इस घटना को कई साल बीत चुके हैं, लेकिन निमृत के अनुसार, इसका प्रभाव आज भी उनके परिवार पर बना हुआ है।


पिता को आखिरी बार देखा घर से निकलते हुए

निमृत ने बातचीत के दौरान अपने पिता को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें आखिरी बार घर से काम पर जाते हुए देखा था। इसके बाद जब वह दोबारा मिलीं, तो वह ताबूत में थे। उन्होंने बताया कि इतनी छोटी उम्र में परिवार पर आई इस त्रासदी से उबरने का उन्हें कोई अवसर नहीं मिला। अचानक आई इस घटना के कारण परिवार को वह भावनात्मक समापन नहीं मिल सका, जिसकी उन्हें आवश्यकता थी।


सात दिनों तक आतंकियों के कब्जे में रहे पिता

निमृत के अनुसार, उनके पिता का अपहरण तब हुआ जब वह काम से लौट रहे थे। अपहरणकर्ताओं ने सेना की वर्दी पहन रखी थी और उन्हें अपने साथ ले गए। उन्होंने बताया कि उनके पिता लगभग सात दिनों तक आतंकियों के कब्जे में रहे, इस दौरान अपहरणकर्ताओं ने कई मांगें रखीं, जिनमें भारत की जेलों में बंद अपने साथियों को रिहा करने की मांग भी शामिल थी।


पिता की चिंता ने किया था प्रभावित

निमृत ने कहा कि उनके पिता को यह पता था कि घर पर उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं। इसलिए, उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियों में भी उनके पिता के मन में परिवार की चिंता जरूर रही होगी।


पिता की मौत के बाद नोएडा में बिताए दिन

मेजर भूपिंदर सिंह की मृत्यु के बाद, निमृत कौर अपनी मां और बहन के साथ अपने नाना-नानी के पास नोएडा चली गई थीं। 12 साल की उम्र में पिता को खोना उनके जीवन का एक बेहद कठिन समय था। निमृत कई बार अपने पिता और उस घटना से जुड़ी यादों के बारे में बात कर चुकी हैं। उनका कहना है कि समय बीतने के बावजूद कुछ जख्म कभी नहीं भरते और परिवार पर उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है।