नाना पाटेकर: संघर्ष से सफलता तक का सफर और यादगार किरदार
नाना पाटेकर का अद्वितीय सफर
नई दिल्ली (वेब वार्ता)। जब भी बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का नाम लिया जाता है, उनकी गहरी आवाज, तीखे एक्सप्रेशन और उन किरदारों की छवि सामने आती है, जिन्हें भुलाना मुश्किल है। कभी उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई, तो कभी 'उदय भाई' बनकर दर्शकों का दिल जीता।
हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब नाना पाटेकर फिल्मों में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उस समय उन्हें एक शो के लिए केवल 50 रुपए मिलते थे, जबकि उनकी पत्नी नीलकांति पाटेकर बैंक में काम करती थीं और उनकी मासिक सैलरी लगभग 2,500 रुपए थी।
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर है। फिल्मों में कदम रखने से पहले उन्होंने थिएटर में अभिनय की शुरुआत की। उनका प्रारंभिक सफर आसान नहीं था। साधारण परिवार से आने वाले नाना ने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था और आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया। एक समय ऐसा आया जब उनकी कमाई इतनी कम थी कि जीवन यापन करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया।
नाना और नीलकांति ने 1978 में विवाह किया, जो बेहद साधारण तरीके से हुआ। उस समय शादी का कुल खर्च लगभग 750 रुपए आया था। नीलकांति उस समय बैंक में अधिकारी थीं और उनकी मासिक आय 2,500 रुपए थी, जबकि नाना को एक शो के लिए महज 50 रुपए मिलते थे।
नाना पाटेकर ने अपने करियर में कई यादगार भूमिकाएँ निभाईं, लेकिन फिल्म 'वेलकम' में उदय शेट्टी का किरदार आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। उनकी संवाद अदायगी, गुस्सा और कॉमिक टाइमिंग ने इस किरदार को खास बना दिया।
हालांकि, नाना की पहचान केवल एक किरदार तक सीमित नहीं रही। उन्होंने 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'अग्नि साक्षी', 'तिरंगा', 'खामोशी: द म्यूजिकल' और 'अब तक छप्पन' जैसी फिल्मों में विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए।
आज नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए किरदार, उनकी आवाज और संवाद हमेशा दर्शकों की यादों में जीवित रहेंगे। कभी एक शो के लिए 50 रुपए पाने वाला यह कलाकार अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर सिनेमा में एक ऐसी पहचान छोड़ गया है, जिसे भुलाना आसान नहीं है।