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नाना पाटेकर: जब अभिनेता ने असली सैनिक बनने की ठानी

नाना पाटेकर, बॉलीवुड के एक अद्वितीय अभिनेता, ने न केवल पर्दे पर सैनिक का किरदार निभाया, बल्कि असली सैनिक बनने के लिए कठिन ट्रेनिंग भी ली। उनकी फिल्म 'प्रहार' में मेजर प्रताप चौहान की भूमिका ने उन्हें एक नई पहचान दी। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने सैनिकों के साथ रहकर अद्वितीय अनुभव प्राप्त किया। जानें उनके जीवन के इस प्रेरणादायक सफर के बारे में और कैसे उन्होंने अपने किरदार को वास्तविकता में उतारा।
 

नाना पाटेकर का अद्वितीय सफर


नई दिल्ली, 08 अक्टूबर (वेब वार्ता)। बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने सैनिक की भूमिका निभाई है, लेकिन नाना पाटेकर की कहानी कुछ खास है। उन्होंने केवल अभिनय नहीं किया, बल्कि अपने किरदार को वास्तविकता में उतारने के लिए सेना की कठिन ट्रेनिंग भी ली।


1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में नाना ने मेजर प्रताप चौहान का किरदार निभाया। इस भूमिका के लिए उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ गहन सैन्य प्रशिक्षण लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने लगभग तीन साल तक मिलिट्री ट्रेनिंग की, ताकि उनका फौजी रूप केवल अभिनय न लगे, बल्कि उसमें सैनिकों की कठोरता और अनुशासन भी झलके।


‘प्रहार’ नाना के लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं थी; वह इसके निर्देशक भी थे और मेजर चौहान की भूमिका निभाई। इस फिल्म में कमांडो ट्रेनिंग, अनुशासन और देशभक्ति को बारीकी से दर्शाया गया।


इस दौरान नाना का सेना के प्रति जुड़ाव इतना गहरा हो गया कि उन्होंने टेरिटोरियल आर्मी में भी सेवा की। लेकिन उनकी असली परीक्षा 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान हुई। उस समय नाना ने केवल दूर से सैनिकों का हौसला बढ़ाने के बजाय युद्ध क्षेत्र में जाने की इच्छा जताई। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से विशेष अनुमति मांगी।


नाना ने बताया कि शुरुआत में उन्हें मना किया गया, लेकिन जब उन्होंने अपनी सैन्य ट्रेनिंग और अनुभव साझा किया, तो उन्हें सैनिकों के साथ जाने की अनुमति मिली।


रिपोर्ट्स के अनुसार, कारगिल युद्ध के दौरान नाना लगभग दो महीने तक सेना के जवानों के साथ रहे और क्विक रिएक्शन टीम का हिस्सा बने। कुछ रिपोर्टों में उनके युद्ध क्षेत्र में रहने का उल्लेख है। उन्होंने बाद में कहा कि उस समय उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी।


एक इंटरव्यू में नाना ने कारगिल के अनुभव को याद करते हुए बताया कि जब वह श्रीनगर पहुंचे, तब उनका वजन लगभग 76 किलो था, लेकिन लौटते समय यह घटकर लगभग 56 किलो रह गया। जवानों के बीच रहना उनके लिए एक जीवन बदलने वाला अनुभव था।


आज नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा निभाए गए किरदार, उनकी आवाज और संवाद हमेशा दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगे।


नाना पाटेकर के निधन पर पूर्व सेना प्रमुख और मिजोरम के गवर्नर जनरल वी.के. सिंह ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “मैंने ‘प्रहार’ फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें करीब से देखा है। वे न केवल एक बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि एक प्रभावशाली व्यक्तित्व भी थे। उन्हें जो भूमिका दी जाती थी, उसमें ढलने के लिए वे कड़ी मेहनत करते थे। उनका समर्पण और काम के प्रति गंभीरता उनकी भूमिकाओं में वास्तविकता लाती थी। भारतीय सिनेमा में उनका योगदान और उनकी यादें हमेशा बनी रहेंगी। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। उनकी आत्मा को शांति मिले। ओम शांति।”