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नाना पाटेकर का निधन: भारतीय सिनेमा का एक और सितारा चला गया

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार पुणे में किया जाएगा, जहां प्रशंसकों की भीड़ उनके अंतिम दर्शन के लिए इकट्ठा हो रही है। 'नाम फाउंडेशन' के सीईओ गणेश थोरात ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि नाना साहब हमेशा मदद के लिए आगे रहते थे। जानें उनके करियर की कुछ प्रमुख उपलब्धियों और अंतिम संस्कार की तैयारियों के बारे में।
 

नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार




पुणे, 8 अक्टूबर। भारतीय फिल्म उद्योग के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार आज शाम पुणे के डोनजे क्षेत्र में उनके निवास 'नानाची वाडी' के निकट किया जाएगा। इस दुखद समाचार ने पूरे महाराष्ट्र और फिल्म जगत में शोक की लहर पैदा कर दी है।


नाना पाटेकर के घर के बाहर उनके प्रशंसकों की एक बड़ी संख्या इकट्ठा हो गई है, जो अपने प्रिय अभिनेता के अंतिम दर्शन के लिए आंखों में आंसू लिए इंतजार कर रहे हैं।


नाना पाटेकर के निधन पर 'नाम फाउंडेशन' के सीईओ गणेश थोरात ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "नाना साहब हमारे लिए और पूरे महाराष्ट्र के लिए पिता समान थे। जब भी किसी को मुसीबत होती थी, नाना साहब सबसे पहले मदद के लिए आगे आते थे। आज उनके जाने से ऐसा लग रहा है जैसे हमारी सुरक्षा की छतरी छिन गई हो।"


थोरात ने आगे कहा कि नाना साहब का परिवार पूरा महाराष्ट्र है। इस कठिन समय में सभी को एकजुट रहने की आवश्यकता है। उनका सपना था कि हर परिवार खुशहाल हो और किसी पर भी दुख का साया न पड़े।


उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में इस समय सूखा चल रहा है और नाना पाटेकर इस मुद्दे पर भी सक्रिय रूप से काम कर रहे थे। उन्होंने प्रशंसकों से अपील की कि जो भी नाना साहब के अंतिम दर्शन करना चाहता है, वह शाम 6 से 7 बजे तक पुणे स्थित उनके निवास पर पहुंच सकता है।


अंतिम संस्कार की तैयारियों का जिम्मा महाराष्ट्र सरकार ने लिया है। प्रशंसकों और चाहने वालों की बड़ी संख्या के मद्देनजर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं जिला कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में की गई हैं।


ज्ञात हो कि नाना पाटेकर ने अपने लगभग पांच दशकों के करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। उन्हें 1990 में आई फिल्म 'राजू बन गया जेंटलमैन' में 'जय' के किरदार के लिए सराहा गया था, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए नामांकित किया गया था।


वर्ष 1992 में आई फिल्म 'अंगार' में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। इसके अलावा, 1994 में आई 'क्रांतिवीर' के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था।