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नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार: बेटे मल्हार ने साझा की भावनाएं और सामाजिक कार्यों की विरासत

दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे में उनके फार्महाउस पर किया गया। उनके बेटे मल्हार ने इस अवसर पर नाना के सामाजिक कार्यों की विरासत को आगे बढ़ाने की बात की। उन्होंने बताया कि शव को गोवा से लाने में समय लगा, जिसके कारण अंतिम संस्कार सूरज ढलने के बाद किया गया। मल्हार ने अपने पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी।
 

नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार

मुंबई, 9 अक्टूबर। दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार गुरुवार रात पुणे जिले के डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस पर किया गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह प्रक्रिया सूरज ढलने के बाद क्यों की गई।


मल्हार ने कहा कि नाना का शव गोवा से फार्महाउस लाने में समय लगा, इसलिए पार्थिव शरीर को लंबे समय तक रखना उचित नहीं था। उन्होंने बताया, "हम गोवा में थे और शव को गांव के फार्महाउस तक लाना था। हमें उम्मीद थी कि जल्दी पहुंच जाएंगे, लेकिन इसमें समय ज्यादा लग गया। इसलिए हमें सूरज ढलने के बाद अंतिम संस्कार करना पड़ा।"


इसके अलावा, मल्हार ने अपने पिता के सामाजिक कार्यों की विरासत को आगे बढ़ाने की बात की। उन्होंने कहा, "मेरे पिता हमेशा कहते थे कि हमें लोगों की मदद करनी चाहिए। हमारा सामाजिक कार्य महाराष्ट्र के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी फैला हुआ है, जिसमें जम्मू-कश्मीर भी शामिल है।"


उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने पहले ही उन लोगों को जिम्मेदारी सौंप दी थी, जो इस कार्य को अच्छे से निभा सकते थे। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि जो भी काम अधूरा है, उसे पूरा किया जाए। उनका सपना और मेरा सपना एक साथ लोगों के लिए काम करना है।"


यह भी उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार ने नाना पाटेकर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।