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नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने 'बैंडिट क्वीन' के महत्व पर किया खुलासा, जानें क्यों है यह फिल्म खास!

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हाल ही में आईएफपी 2023 में 'बैंडिट क्वीन' के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह फिल्म उनके लिए खास क्यों है और थिएटर के अनुभव को कैसे महत्व देते हैं। जानें इस सत्र में उन्होंने क्या-क्या साझा किया और क्यों यह फिल्म उनके करियर में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
 

आईएफपी 2023: नवाजुद्दीन सिद्दीकी का खास सेशन




मुंबई, 2 दिसंबर। इंडियन फिल्म प्रोजेक्ट (आईएफपी) हर साल फिल्म निर्माताओं, कलाकारों और रचनाकारों को एक मंच पर लाता है। यह आयोजन केवल सिनेमा तक सीमित नहीं है, बल्कि कला, संगीत, थिएटर और साहित्य जैसी विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है। इस वर्ष, दर्शकों की संख्या ने इस कार्यक्रम को विशेष बना दिया।


इस बार 'आईएफपी' का सबसे चर्चित सत्र 'बिहाइंड द सीन: मैं एक्टर नहीं हूं' था, जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी और फिल्म निर्माता-लेखक आदित्य कृपलानी ने मंच साझा किया। जब ये दोनों कलाकार मंच पर आए, तो दर्शकों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। इस सत्र में नवाजुद्दीन ने अभिनय के अनुभव, थिएटर और फिल्मों में काम करने के दृष्टिकोण और करियर की चुनौतियों पर चर्चा की।


नवाजुद्दीन ने अपने सत्र में फिल्मों और थिएटर के बीच के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, "फिल्मों में कैमरा केवल आपकी हरकतों और छोटे-छोटे व्यवहार को कैद करता है, जबकि थिएटर में आपको हर भावना और क्रिया को पूरी तरह से व्यक्त करना होता है। उदाहरण के लिए, यदि आप हाथ में गिलास पकड़े हैं और उसे हिलाते हैं, तो फिल्म में कैमरा केवल उस क्रिया को दिखाएगा, लेकिन स्टेज पर आपको उसे बोलकर और पूरी तरह से निभाकर प्रस्तुत करना होता है।"


उन्होंने आगे कहा, "इसलिए मैंने हमेशा थिएटर को अपने लिए बहुत महत्वपूर्ण माना है।"


अभिनेता ने यह भी कहा, "थिएटर केवल अभिनय का माध्यम नहीं है, बल्कि यह खुद को समझने और अपनी सीमाओं को पहचानने का एक तरीका भी है। भारत में थिएटर के कई अलग-अलग रूप हैं और हर कलाकार को इन सभी रूपों का अनुभव करना चाहिए। यह अनुभव ही कलाकारों को अधिक संवेदनशील और वास्तविक बनाता है, जो उनके अभिनय में स्पष्ट दिखाई देता है।"


इस अवसर पर, नवाजुद्दीन ने अपनी पसंदीदा फिल्मों में से एक 'बैंडिट क्वीन' के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा, "यह फिल्म मेरे लिए बेहद खास है, क्योंकि इसके अधिकांश कलाकार थिएटर से आए थे।"


फिल्म 'बैंडिट क्वीन' 1994 में रिलीज हुई थी, जो फूलन देवी के जीवन पर आधारित थी। इसका निर्देशन शेखर कपूर ने किया था और इसमें सीमा बिस्वास ने मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म माला सेन की किताब 'इंडियाज बैंडिट क्वीन: द ट्रू स्टोरी ऑफ फूलन देवी' पर आधारित थी।