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धर्मेश येलांडे: मिसल पाव से डांस के बादशाह बनने की प्रेरणादायक कहानी

धर्मेश येलांडे, जो कभी चपरासी की नौकरी करते थे, आज डांस की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुके हैं। उनकी प्रेरणादायक यात्रा में संघर्ष, मेहनत और सफलता की अनगिनत कहानियाँ हैं। जानें कैसे उन्होंने अपने सपनों को साकार किया और डांस रियलिटी शो में अपनी पहचान बनाई।
 

धर्मेश येलांडे का संघर्ष और सफलता




मुंबई, 30 अक्टूबर। डांस की दुनिया में अपनी अनोखी पहचान बनाने वाले धर्मेश येलांडे अब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह एक सफल डांसर, कोरियोग्राफर, अभिनेता और टीवी रियलिटी शो के जाने-माने चेहरे हैं। लेकिन, इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। एक समय ऐसा था जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए कई छोटी-मोटी नौकरियां करनी पड़ीं।


धर्मेश ने कभी चपरासी की नौकरी की तो कभी मिसल पाव का ठेला लगाया। आज वही धर्मेश डांस की दुनिया में अपनी मेहनत के बल पर एक बड़ा नाम बन चुके हैं।


धर्मेश येलांडे का जन्म 31 अक्टूबर 1983 को गुजरात के वडोदरा में हुआ। उनके पिता की एक छोटी सी दुकान थी। बचपन से ही उन्हें डांस का शौक था, और वह टीवी पर गोविंदा के डांस को देखकर उनकी नकल करने की कोशिश करते थे। छठी कक्षा में उन्होंने एक डांस प्रतियोगिता जीती, जिसके बाद उनके पिता ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्हें डांस क्लास में दाखिला दिलाया।


धर्मेश के परिवार के लिए एक समय बहुत कठिन था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि नगर निगम ने उनके पिता की दुकान तोड़ दी थी, जिसके बाद उनके पिता ने चाय का ठेला लगाना शुरू किया। इससे रोजाना 50 से 60 रुपए की कमाई होती थी, जो चार लोगों के परिवार का खर्च चलाने के लिए काफी नहीं थी। ऐसे में धर्मेश ने भी परिवार की मदद करने का निर्णय लिया और 19 साल की उम्र में कॉलेज छोड़कर चपरासी की नौकरी करने लगे। इस काम से उन्हें महीने में लगभग 1,600 रुपए मिलते थे।


धर्मेश ने वडोदरा में अपने पिता की चाय की दुकान के पास ही मिसल पाव का ठेला भी लगाया ताकि उन्हें डांस की प्रैक्टिस के लिए समय मिल सके। इसी दौरान उन्होंने एक फिल्म में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर भी काम किया।


अपने सपने को पूरा करने के लिए धर्मेश मुंबई पहुंचे और डांस रियलिटी शो 'बूगी वूगी' में भाग लिया, जहां उन्होंने पहला स्थान हासिल किया। इस जीत से उन्हें पांच लाख रुपए की पुरस्कार राशि मिली, जिससे उन्होंने अपने पिता का कर्ज चुकाया। हालांकि, फिल्मों में काम पाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने दो साल तक मुख्य भूमिका पाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आर्थिक स्थिति फिर से खराब होने लगी और उन्हें वापस वडोदरा लौटना पड़ा।


कुछ समय बाद, धर्मेश ने 'डांस इंडिया डांस' के दूसरे सीजन के लिए ऑडिशन दिया और उनका चयन हो गया। वह इस शो के विजेता नहीं बने, लेकिन उनकी डांस परफॉर्मेंस ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद उन्हें कई डांस शो में काम मिलने लगा और वह बड़े कलाकारों के साथ काम करने लगे।


धर्मेश को फिल्मों में काम करने का मौका कोरियोग्राफर और निर्देशक रेमो डिसूजा ने दिया। उन्होंने 2013 में आई फिल्म 'एबीसीडी: एनीबडी कैन डांस' में मुख्य भूमिका निभाई। इसके बाद वह 'एबीसीडी 2', 'बैंजो', 'नवाबजादे' और 'स्ट्रीट डांसर 3डी' जैसी फिल्मों में भी नजर आए। इसके अलावा, उन्होंने 'खतरों के खिलाड़ी 10' में भी भाग लिया और शो के सेकंड रनर-अप रहे।