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धर्मेंद्र: एक ऐसा नेता जो प्यार और विकास के लिए हमेशा याद किए जाएंगे

दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र, जिन्होंने 89 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कहा, केवल एक सुपरस्टार नहीं थे, बल्कि उनकी राजनीतिक छवि भी लोगों के दिलों में बसी हुई थी। बीकानेर के पूर्व सांसद के रूप में, उन्होंने समाज सेवा और विकास कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके द्वारा किए गए कार्यों और चुनावी शालीनता के किस्से आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय हैं। जानें धर्मेंद्र की विरासत और उनके योगदान के बारे में।
 

धर्मेंद्र का निधन और उनकी विरासत


जयपुर, 24 नवंबर। दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र, जिन्होंने 89 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहा, केवल बॉलीवुड के सुपरस्टार नहीं थे, बल्कि उनकी राजनीतिक छवि भी लोगों के दिलों में बसी हुई थी। उन्हें हमेशा प्यार, विनम्रता और समाज सेवा के लिए जाना जाता रहा। बीकानेर ने सोमवार को एक ऐसे पूर्व सांसद को खो दिया, जो हमेशा लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहते थे।


धर्मेंद्र का बीकानेर से न केवल राजनीतिक बल्कि भावनात्मक संबंध भी था। भले ही उन्होंने सांसद रहते हुए शहर में ज्यादा समय नहीं बिताया, लेकिन उनके द्वारा किए गए कई कार्य आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। इनमें से एक प्रमुख कार्य सूरसागर तालाब प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना था।


चुनाव प्रचार के दौरान जब उन्होंने देखा कि तालाब की स्थिति खराब है, तो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से संपर्क किया। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्रियों से भी बात की और फंड जुटाने में सफल रहे। उन्होंने अपने सांसद कोटे से भी धन देने में कोई कसर नहीं छोड़ी और सूरसागर तालाब की स्थिति को समय पर सुधारने में मदद की। बीकानेर के लोग आज भी उनके इस प्रयास को याद करते हैं।


धर्मेंद्र का 2004 का चुनाव अभियान उनकी शालीनता के लिए भी जाना जाता है। कांग्रेस के उम्मीदवार रामेश्वर डूडी के खिलाफ कड़े मुकाबले में भी उन्होंने कभी व्यक्तिगत हमले नहीं किए। उन्होंने डूडी को बार-बार 'छोटा भाई' कहा, जिससे चुनाव के दौरान डूडी ने भी व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचने का प्रयास किया। यह चुनाव बीकानेर में सबसे मित्रवत और शालीन मुकाबलों में से एक माना गया।


धर्मेंद्र ने अपने स्टार पावर का उपयोग करते हुए अपने बेटों सनी और बॉबी देओल को बीकानेर बुलाया, जिससे बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और शहर का माहौल बदल गया। इस समर्थन के चलते उन्होंने 57,000 वोटों से जीत हासिल की।


सांसद रहते हुए, धर्मेंद्र ने विकास कार्यों के लिए दिल खोलकर धन दिया। उन्होंने स्थानीय समाजों, संस्थाओं और सामुदायिक कार्यों के लिए लगातार वित्तीय सहायता प्रदान की। आज भी बीकानेर में कई बोर्ड हैं जिन पर उनका नाम लिखा हुआ है, जो उनके कार्यकाल में पूरी हुई परियोजनाओं की याद दिलाते हैं। अधिकांश परियोजनाओं की सिफारिश उनके पार्टी सहयोगियों सत्यप्रकाश आचार्य और कमल व्यास ने की थी।


धर्मेंद्र के पार्टी में रिश्ते भी खास थे। वे चुनाव प्रभारी मानिकचंद सुराणा को प्यार से 'कोट पहनने वाले नेताजी' कहते थे। यह उपनाम मजाक में था, लेकिन यह उनके स्नेह और आत्मीयता को दर्शाता है।


धर्मेंद्र की लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि बीकानेर के लोग उन्हें विवादों या राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं, बल्कि उनके प्यार, विकास कार्यों और सभी के प्रति अपनेपन के लिए याद करते हैं।