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दिव्या भारती: 90 के दशक की चमकती सितारा और उनकी अनकही कहानियाँ

दिव्या भारती, 90 के दशक की एक चमकती सितारा, ने दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर हिंदी सिनेमा तक अपनी अदाकारी से सबको प्रभावित किया। उनकी असामयिक मृत्यु ने फिल्म इंडस्ट्री को गहरा सदमा पहुँचाया। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ, उनके पसंदीदा सितारे और उनकी सफल फिल्मों के बारे में।
 

दिव्या भारती का अद्वितीय सफर


मुंबई, 4 अप्रैल। 90 के दशक में कई अभिनेत्रियों ने सिनेमा की दुनिया में अपनी छाप छोड़ी, लेकिन दिव्या भारती ने दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर हिंदी सिनेमा तक अपनी अदाकारी से सबको प्रभावित किया। उनकी असामयिक मृत्यु ने फिल्म इंडस्ट्री को गहरा सदमा पहुँचाया। दिव्या का निधन 5 अप्रैल 1993 को हुआ था।


दिव्या भारती उस समय हिंदी सिनेमा की एक चमकदार सितारा बन चुकी थीं। उनके चुलबुले व्यक्तित्व के दीवाने थे, लेकिन वे खुद अमिताभ बच्चन और जितेंद्र की फैन थीं। जब दिव्या ने पहली बार अमिताभ बच्चन से मुलाकात की, तो उन्होंने अपने हाथ को 10 दिन तक धोने से मना कर दिया था। यह मुलाकात एक रैली में हुई थी, जहाँ दिव्या अपने पिता के साथ गई थीं। उस समय वे इतनी खुश थीं कि उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे अपने हाथ नहीं धोएंगी, लेकिन बाद में उन्हें मजबूरी में ऐसा करना पड़ा।


दिव्या के दिल में जितेंद्र के लिए विशेष स्थान था। उन्होंने एक बार कहा था कि वे हमेशा जितेंद्र के साथ रोमांस करना चाहती थीं, लेकिन जब उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा, तो जितेंद्र पिता के किरदार निभाने लगे। इस कारण उनका सपना अधूरा रह गया।


दिव्या बचपन से ही सिनेमा में काम करने की ख्वाहिश रखती थीं। पढ़ाई में उनकी रुचि कम थी, इसलिए उन्होंने एक्टिंग को चुना। उनके अनुसार, शूटिंग करना पढ़ाई से कहीं अधिक आसान था।


1990 में दिव्या ने तमिल फिल्म 'निल्ली पन्ने' से टॉलीवुड में कदम रखा और इसके बाद 'विश्वात्मा' से बॉलीवुड में एंट्री की। लेकिन 'दिवाना' फिल्म ने उन्हें असली पहचान दिलाई। उनकी मृत्यु से पहले कई फिल्में जैसे 'लाडला', 'मोहरा', 'विजयपथ', 'कन्यादान', और 'आंदोलन' उनके नाम थीं। उनकी मौत के बाद इन फिल्मों में अन्य अभिनेत्रियों ने काम किया और सभी फिल्में सफल रहीं।