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दिव्या दत्ता ने साझा की अपनी यादगार राष्ट्रीय पुरस्कार की कहानी, जानें क्या है खास!

दिव्या दत्ता ने हाल ही में अपने पहले राष्ट्रीय पुरस्कार की यादों को साझा किया, जो उन्हें फिल्म 'इरादा' के लिए मिला था। इस भावुक पोस्ट में, उन्होंने अपने भाई के साथ उस खास पल को याद किया और बताया कि कैसे इस फिल्म ने उन्हें अपनी मां के निधन के दुख से उबरने में मदद की। जानें इस पुरस्कार के पीछे की कहानी और दिव्या के करियर में इसका महत्व।
 

दिव्या दत्ता का पुरस्कार समारोह का यादगार पल


मुंबई, 1 जून। अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने भारतीय फिल्म उद्योग में अपनी बहुआयामी प्रतिभा से दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बना लिया है। उन्हें 2018 में फिल्म 'इरादा' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ था। सोमवार को, उन्होंने इस महत्वपूर्ण क्षण को याद करते हुए एक भावुक वीडियो साझा किया।


इस वीडियो में, दिव्या नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पुरस्कार ग्रहण करते हुए दिखाई दे रही हैं। साथ ही, इसमें 'इरादा' फिल्म में उनके द्वारा निभाए गए पंजाब की मुख्यमंत्री के किरदार की झलकियां भी शामिल हैं।


दिव्या ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए लिखा, "यह क्षण मेरे लिए बेहद खास था। 'इरादा' के लिए मिला मेरा पहला राष्ट्रीय पुरस्कार आज भी मेरे दिल में बसा हुआ है। उस खुशी के पल में मेरे भाई ने मेरा हाथ थामकर मेरे साथ डांस किया था।"


उन्होंने यह भी बताया कि इस फिल्म ने उन्हें अपनी मां के निधन के दुख से उबरने में मदद की। उन्होंने लिखा, "'इरादा' मेरी पहली फिल्म थी, जिसकी शूटिंग मैंने मां के जाने के बाद की थी। उस समय मैं भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर थी, लेकिन इस फिल्म ने मुझे उस कठिन समय से बाहर निकलने में सहायता की।"


दिव्या दत्ता को 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में 'इरादा' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार मिला था। यह पुरस्कार उन्हें फिल्म में उनके प्रभावशाली अभिनय के लिए दिया गया था।


फिल्म 'इरादा' में दिव्या ने पंजाब की मुख्यमंत्री का किरदार निभाया था, जिसमें नसीरुद्दीन शाह और अरशद वारसी जैसे अनुभवी कलाकार भी शामिल थे। यह उनके करियर का पहला राष्ट्रीय पुरस्कार था, जिसने उनके अभिनय को नई पहचान और सराहना दिलाई।


इस फिल्म में उनका किरदार एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता का था, जो सत्ता और राजनीतिक दबावों का सामना कर रही थी। कहानी राज्य में बढ़ते प्रदूषण और कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं के इर्द-गिर्द घूमती है।