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दिव्या दत्ता ने ओटीटी के प्रभाव पर किया खुलासा: कैसे बदलीं कहानियां और किरदार

अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रभाव पर चर्चा की है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे कहानियों और किरदारों में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं विभिन्न उम्र में मजबूत किरदार निभा रही हैं, और दर्शकों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। दिव्या ने ओटीटी की विशेषताओं और दर्शकों की पसंद के बारे में भी अपने विचार साझा किए। जानें इस बदलाव के पीछे की कहानी और दिव्या का नजरिया।
 

ओटीटी का नया युग: कहानियों और किरदारों में बदलाव




मुंबई, 28 अक्टूबर। अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने हाल ही में एक विशेष बातचीत में ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रभाव पर चर्चा की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे फिल्मों और वेब सीरीज में कहानियों को प्रस्तुत करने का तरीका बदल गया है। उनका कहना है कि अब ऐसी कहानियों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जो दर्शकों के साथ जुड़ाव पैदा करती हैं। विशेष रूप से, महिलाओं के किरदारों में यह बदलाव स्पष्ट है। पहले, अभिनेत्रियों को अक्सर सीमित उम्र तक ही प्रमुख भूमिकाएं मिलती थीं, लेकिन अब 40 साल की उम्र के बाद भी उन्हें विविध और मजबूत किरदार निभाने का अवसर मिल रहा है।


दिव्या ने कहा, "ओटीटी के आगमन के बाद कहानी कहने पर जोर दिया जाने लगा है। अब वास्तविक कहानियां सुनाई जा रही हैं, जिनसे लोग खुद को जोड़ सकते हैं। मुझे लगता है कि ओटीटी ने विभिन्न उम्र की महिलाओं के लिए बेहतरीन किरदारों के दरवाजे खोले हैं। अब 20, 30 या 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए भी ऐसे किरदार लिखे जा रहे हैं, जिनमें अभिनय की भरपूर गुंजाइश होती है। पहले यह सोचना भी मुश्किल था कि इस उम्र की महिलाओं को किसी कहानी में मुख्य भूमिका मिल सकती है, लेकिन अब किरदारों में पहले से अधिक गहराई देखने को मिलती है।"


एक्ट्रेस ने आगे कहा, "ओटीटी ने मानव व्यवहार को अधिक वास्तविकता के साथ दिखाने का अवसर प्रदान किया है। किसी कठिन परिस्थिति में हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया भिन्न हो सकती है। गुस्सा करना या गलती करना किसी को पूरी तरह से अच्छा या बुरा नहीं बनाता। हर व्यक्ति के व्यक्तित्व में कई पहलू होते हैं, और ओटीटी ने किरदारों में इन्हीं पहलुओं को जगह दी है और अच्छी लेखनी को बढ़ावा दिया है।"


दिव्या ने यह भी बताया कि दर्शकों ने कहानियों में आए इस बदलाव को सराहा है। ओटीटी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि दर्शक अपनी सुविधा के अनुसार, अपनी पसंद के समय पर और अपनी जरूरत के अनुसार कुछ भी देख सकते हैं। वे चाहें तो अकेले देख सकते हैं या परिवार के साथ बैठकर इसका आनंद ले सकते हैं। जब दर्शकों को इस तरह की स्वतंत्रता मिलती है, तो मनोरंजन की दुनिया में भी बदलाव आता है।


उन्होंने कहा, "ओटीटी पर बेहतरीन कहानियां और मजबूत किरदार देखने के बाद दर्शकों की उम्मीदें सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों से भी बढ़ गई हैं। अब दर्शक बड़े पर्दे पर भी ऐसे किरदार देखना चाहते हैं, जिनमें गहराई और वास्तविकता हो। पहले इस तरह की उम्मीद कम देखने को मिलती थी, लेकिन अब यह दर्शकों की पसंद का हिस्सा बन गई है।"