दलीप ताहिल: जब युवा अभिनेता ने निभाया पिता का किरदार, जानें उनकी अनकही कहानी
दलीप ताहिल का अद्वितीय करियर
मुंबई, 29 अक्टूबर। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने अपनी उम्र से कहीं बड़े किरदार निभाकर दर्शकों को चौंका दिया है। इनमें से एक हैं दलीप ताहिल, जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही पिता का रोल अदा किया।
1980 और 90 के दशक में, जब वह खुद युवा थे, तब उन्होंने कई प्रमुख सितारों के पिता का किरदार निभाया। 'कयामत से कयामत तक' में आमिर खान के पिता का किरदार निभाकर दलीप ताहिल ने यह साबित किया कि अभिनय में उम्र का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि टैलेंट सबसे महत्वपूर्ण है।
दलीप ताहिल का जन्म 30 अक्टूबर 1952 को आगरा में हुआ था। उनका असली नाम 'दलीप घनश्याम ताहिलरामानी' था, जिसे नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में दाखिला लेते समय छोटा कर दिया गया।
कॉलेज के बाद, 1968 में, वह मुंबई आए और बॉम्बे थिएटर ग्रुप में शामिल हुए। वहां उन्होंने प्रसिद्ध निर्देशकों एलिक और पर्ल पदमसी से अभिनय की बारीकियां सीखी। उन्हें बड़े पर्दे पर पहला मौका श्याम बेनेगल की फिल्म 'अंकुर' (1974) में मिला, लेकिन उनका रोल छोटा होने के कारण उन्हें पहचान नहीं मिली।
इसके बाद, दलीप ताहिल को लगभग छह साल तक फिल्मों में कोई काम नहीं मिला। इस दौरान उन्होंने मॉडलिंग की और विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाए। फिर उन्होंने 'शान' (1980) जैसी फिल्मों में छोटे-बड़े किरदार निभाए, लेकिन मुख्यधारा में पहचान बनाने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। इस समय में उन्होंने टेलीविजन शो 'बुनियाद' और 'द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान' में भी काम किया।
शो 'बुनियाद' में उनकी अदाकारी ने मशहूर फिल्म निर्माता नासिर हुसैन को प्रभावित किया, जिन्होंने उन्हें अपनी फिल्म 'कयामत से कयामत तक' में आमिर खान के पिता का किरदार ऑफर किया। दिलचस्प बात यह है कि जब दलीप ताहिल ने यह रोल स्वीकार किया, तब उनकी उम्र केवल 31 वर्ष थी, जबकि आमिर खान लगभग 23 वर्ष के थे। दलीप ताहिल ने कहा कि यह किरदार उन्हें इतना दिलचस्प लगा कि उन्होंने तुरंत हां कर दी।
शुरुआत में वह हीरो बनना चाहते थे, लेकिन बाद में उन्हें कैरेक्टर रोल और निगेटिव भूमिकाओं में सफलता मिली। 1993 में शाहरुख खान की फिल्म 'बाजीगर' में 'मदन चोपड़ा' का किरदार उन्हें घर-घर में मशहूर कर गया।