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थलापति विजय: सिनेमा से राजनीति तक का अद्भुत सफर

थलापति विजय, जो तीन दशकों से तमिलनाडु के दिलों पर राज कर रहे हैं, ने हाल ही में राजनीति में कदम रखा है। उनके सफर की शुरुआत एक संघर्षशील अभिनेता के रूप में हुई, जिसने बाद में सुपरस्टार का दर्जा प्राप्त किया। 'घिल्ली' से लेकर 'सर्कार' तक, विजय ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाई, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी आवाज उठाई। अब, उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी 'तमिलागा वेत्त्री काझगम' की स्थापना की है और चुनावों में शानदार सफलता हासिल की है। जानें उनके अद्भुत सफर के बारे में।
 

थलापति विजय का जादू

तीस वर्षों से अधिक समय से, तमिलनाडु विजय के जादू में बंधा हुआ है। उनकी फिल्में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ऐसे आयोजन बन गईं जो पूरे शहरों को थाम लेती थीं। रिलीज के दिन स्कूलों में अनौपचारिक छुट्टियाँ होती थीं, और प्रशंसक थिएटरों के बाहर जश्न मनाते थे, यहां तक कि पहले शो से पहले भी। थलापति ने भारतीय सिनेमा में एक अत्यंत समर्पित प्रशंसक आधार तैयार किया, जो उनकी साधारणता से गहराई से जुड़ा हुआ था। फिर अचानक, उन्होंने फिल्म उद्योग से एक बड़े मंच पर कदम रखा!

विजय ने 1992 में केवल 18 वर्ष की आयु में 'नालैया थेरपू' के साथ अपने लीड रोल की शुरुआत की। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और समीक्षकों ने इसे नकारात्मक रूप से लिया। फिर भी, विजय ने हार नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा। उन्होंने 'रासिगन' (1994) और 'पुवे उनक्कागा' (1996) जैसी फिल्मों के साथ सफलता प्राप्त की, और 1997 में अपने रोमांटिक फिल्म 'काधालुक्कु मरियाधै' के लिए राज्य फिल्म पुरस्कार जीता। लेकिन रोमांस तो केवल एक शुरुआत थी।


सुपरस्टार बनने की यात्रा

सुपरस्टार बनने की यात्रा

यदि कोई फिल्म है जिसने विजय को अभिनेता से सुपरस्टार थलापति में बदल दिया, तो वह 'घिल्ली' (2004) है। यह फिल्म घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपये से अधिक कमाने वाली पहली तमिल फिल्म बनी और पूरे राज्य में 200 दिनों तक चली। विजय ने एक कबड्डी खिलाड़ी की भूमिका निभाई, जो एक खतरनाक बचाव अभियान में फंस जाता है, और दर्शकों ने उनकी इस नई छवि को सराहा।

2010 के दशक में, विजय ने एक नया रूप धारण किया। वह अब केवल एक रोमांटिक हीरो नहीं थे; वह आम आदमी की आवाज बनकर उभरे। 'थुप्पक्की' (2012) में उन्होंने एक सेना अधिकारी की भूमिका निभाई, जो आतंकवादी समूह का पीछा करता है। उनके इस देशभक्ति के किरदार को प्रशंसा मिली। इसके बाद, 'कथ्थी' (2014) उनकी सबसे राजनीतिक फिल्म बन गई, जिसमें उन्होंने एक कार्यकर्ता और एक सुधारित अपराधी की दोहरी भूमिकाएँ निभाईं।


राजनीति में कदम

राजनीति में कदम

फरवरी 2024 में, विजय ने फिल्मों से संन्यास लेने की घोषणा की और अपनी राजनीतिक पार्टी 'तमिलागा वेत्त्री काझगम' (TVK) की स्थापना की। कई लोग संदेह में थे। तमिलनाडु में पहले भी कई अभिनेता राजनीति में आए हैं, लेकिन कोई भी DMK और AIADMK की पकड़ को इस तरह से नहीं तोड़ सका।

18 मार्च 2026 को, विजय ने घोषणा की कि TVK सभी 234 निर्वाचन क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी। यह एक साहसिक कदम था। 29 मार्च 2026 को, उन्होंने TVK का घोषणापत्र जारी किया, जिसमें नशामुक्त राज्य, युवाओं के लिए नौकरी की गारंटी, बिना जमानत के शिक्षा ऋण, और छात्रों के लिए मासिक वित्तीय सहायता का वादा किया।

परिणाम ने पूरे देश को चौंका दिया। TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई, DMK और AIADMK को हराते हुए। विजय ने दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा और दोनों में जीत हासिल की।