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तुषार कपूर ने क्यों नहीं लिया बहन एकता कपूर की मदद? जानें उनकी कहानी

तुषार कपूर ने बॉलीवुड में 25 साल पूरे कर लिए हैं, लेकिन उन्होंने अपनी बहन एकता कपूर की मदद नहीं ली। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने दम पर करने का निर्णय लिया। जानें उनके इस फैसले के पीछे की कहानी और कैसे उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
 

तुषार कपूर का करियर और परिवार की भूमिका




मुंबई, 13 जुलाई। अभिनेता तुषार कपूर ने बॉलीवुड में अपने 25 साल पूरे कर लिए हैं। उनके पिता जितेंद्र इस उद्योग के प्रमुख सितारों में से एक रहे हैं, जबकि उनकी बहन एकता कपूर टेलीविजन और फिल्म क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नाम हैं। हालांकि, तुषार ने अपने करियर की शुरुआत अपने बलबूते पर करने का निर्णय लिया।


एक इंटरव्यू में तुषार ने साझा किया कि वह नहीं चाहते थे कि उनकी पहचान केवल परिवार के नाम से हो, इसलिए उन्होंने अपनी पहली फिल्म के लिए बहन एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस को अस्वीकार कर दिया।


तुषार ने कहा, ''मैंने एक बार एकता से स्पष्ट कर दिया था कि मैं तुम्हारे साथ कभी भी कोई फिल्म नहीं करूंगा। मेरी पहली फिल्म तुम्हारे साथ नहीं होगी। इस बात से वह काफी निराश हुई थीं।''


उन्होंने आगे बताया, ''जब एकता को पता चला कि निर्माता वाशु भगनानी मुझे लॉन्च कर रहे हैं और उन्होंने फिल्म 'मुझे कुछ कहना है' का पोस्टर देखा, तो वह बहुत खुश हुईं।''


तुषार ने कहा, ''फिल्म का पहला पोस्टर बहुत खास था। इसमें मेरा चेहरा नहीं था, बल्कि यह बारिश और छतरी के साथ बनाया गया था। उस समय सोशल मीडिया का कोई दौर नहीं था, इसलिए पोस्टर को आम जनता के सामने लाने से पहले डिस्ट्रीब्यूटर्स को दिखाया गया था। एकता ने जब पोस्टर देखा, तो उन्हें लगा कि वाशु भगनानी मेरे लिए सही तरीके से काम करेंगे।''


जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका यह निर्णय ईगो से प्रेरित था या वे सच में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे, तो उन्होंने कहा, ''यह ईगो नहीं था। मैं हमेशा चाहता था कि न तो मेरे माता-पिता और न ही मेरी बहन मुझे लॉन्च करें। मैं अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर आगे बढ़ना चाहता था। परिवार के किसी सदस्य द्वारा लॉन्च होना आसान होता है, लेकिन असली सफलता तब होती है जब कोई व्यक्ति अपने दम पर कुछ हासिल करता है।''


तुषार कपूर ने 2001 में फिल्म 'मुझे कुछ कहना है' से बॉलीवुड में कदम रखा, जिसमें करीना कपूर खान भी थीं। इस फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और तुषार को एक नई पहचान मिली। इस फिल्म ने भी इस साल अपनी रिलीज के 25 साल पूरे किए हैं।