तापसी पन्नू ने फिटनेस के दबाव पर तोड़ी चुप्पी, कहा- हर महिला का शरीर है खास!
फिटनेस और खूबसूरती का दबाव
मुंबई, 31 मई। फिल्म उद्योग में फिटनेस और सुंदरता पर चर्चा हमेशा होती रहती है। सोशल मीडिया के प्रभाव से यह दबाव और भी बढ़ गया है, खासकर महिलाओं के बीच फ्लैट पेट और जीरो फिगर पाने की होड़। इस विषय पर बॉलीवुड की अभिनेत्री तापसी पन्नू ने अपनी राय साझा की और कहा कि शरीर के हर हिस्से का एक उद्देश्य होता है, इसलिए केवल दिखावे के लिए उसे बदलने का प्रयास करना उचित नहीं है।
तापसी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट में लिखा, ''एक समय था जब मैं भी फ्लैट पेट पाने की चाहत रखती थी। मैं बचपन से ही फिट थी और नियमित रूप से व्यायाम करती थी, लेकिन फिर भी मेरे पेट के निचले हिस्से में थोड़ा फैट बना रहता था। उस समय मुझे समझ नहीं आता था कि ऐसा क्यों होता है। इसी कारण मैंने अत्यधिक वर्कआउट करना शुरू कर दिया।''
उन्होंने आगे कहा, ''बाद में मुझे एहसास हुआ कि जरूरत से ज्यादा व्यायाम करना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। जब कोई व्यक्ति अपने शरीर को उसकी क्षमता से अधिक काम करने के लिए मजबूर करता है, तो शरीर इसे खतरे के रूप में देखता है। ऐसे में शरीर खुद को सुरक्षित रखने के लिए पानी जमा करना शुरू कर देता है। कई बार पेट के निचले हिस्से में जो उभार दिखाई देता है, वह केवल फैट नहीं बल्कि पानी रुकने के कारण भी हो सकता है। अत्यधिक वर्कआउट करने से यह समस्या और बढ़ सकती है।''
तापसी ने कहा, ''हर महिला का शरीर अलग होता है और किसी भी दो व्यक्तियों की शारीरिक संरचना समान नहीं हो सकती। महिलाओं के शरीर में हार्मोन लगातार बदलते रहते हैं, जिसका प्रभाव शरीर की बनावट पर भी पड़ता है। इसलिए यह उम्मीद करना गलत है कि हर दिन शरीर एक जैसा दिखेगा। कई महिलाएं खुद की तुलना अन्य लड़कियों या सोशल मीडिया पर दिखने वाली तस्वीरों से करती हैं, जोकि गलत है। हर व्यक्ति का शरीर अपनी अलग आवश्यकताओं और प्रकृति के अनुसार काम करता है।''
उन्होंने अपनी न्यूट्रिशनिस्ट मुनमुन गनेरीवाल की सलाह का भी उल्लेख किया। तापसी ने कहा, ''पेट के निचले हिस्से में थोड़ा फैट और पानी होना महिलाओं के लिए आवश्यक माना जाता है। इसका कारण यह है कि इसी हिस्से में महिलाओं के प्रजनन अंग होते हैं, जिन्हें सुरक्षा की आवश्यकता होती है। शरीर स्वाभाविक रूप से इस हिस्से की रक्षा के लिए थोड़ी अतिरिक्त परत बनाकर रखता है। इसलिए इसे कमजोरी या खराब फिटनेस की निशानी नहीं माना जाना चाहिए।''