तमिल सिनेमा के दिग्गज के. भाग्यराज को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
के. भाग्यराज का अंतिम संस्कार
मुंबई, 28 जून। तमिल सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, अभिनेता और लेखक के. भाग्यराज को रविवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनका अंतिम संस्कार चेन्नई के बेसेंट नगर इलेक्ट्रिक श्मशान घाट पर संपन्न हुआ। उनके निधन से तमिल फिल्म उद्योग में शोक की लहर फैल गई।
के. भाग्यराज को सिनेमा में एक ऐसे कलाकार के रूप में जाना जाता है जिन्होंने हर भूमिका में अपनी प्रतिभा साबित की। उन्होंने न केवल अभिनय किया, बल्कि निर्देशक, स्क्रीनप्ले लेखक, संवाद लेखक और संगीतकार के रूप में भी उत्कृष्ट कार्य किया। उनकी विशेषता यह थी कि वे आम इंसान की जिंदगी को सरलता से पर्दे पर प्रस्तुत करते थे, जिससे दर्शक उनकी कहानियों से जुड़ जाते थे।
उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत उनकी कहानी कहने की अनोखी शैली थी। वे अपने पात्रों को वास्तविकता के करीब और सरल तरीके से दर्शाते थे। उनके संवाद सीधे दर्शकों के दिलों में उतरते थे, यही कारण है कि उन्हें तमिल सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्मकारों में गिना जाता है।
के. भाग्यराज ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म 'सुवरिल्लाथ चिथिरंगल' से बतौर निर्देशक की थी। इसके बाद उन्होंने कई ऐसी फिल्में बनाई जो आज भी क्लासिक मानी जाती हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में 'मौना गीथंगल', 'अंधा 7 नाटकल' और 'मुथानई मुधिचु' शामिल हैं। उनकी फिल्मों में रोमांस, पारिवारिक ड्रामा और कॉमेडी का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता था। वे ऐसे विषयों का चयन करते थे जो आम जीवन से जुड़े होते थे।
के. भाग्यराज का जन्म तमिलनाडु के इरोड जिले के वेल्लाकोईल में हुआ था। शनिवार को उनका निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उनकी उम्र 73 वर्ष थी। उनके निधन की सूचना के बाद फिल्म उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पार्थिव शरीर को चेन्नई स्थित उनके निवास पर रखा गया, जहां फिल्म जगत के कई प्रमुख कलाकार, राजनेता और हजारों प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
श्मशान घाट पर के. भाग्यराज को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।