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टॉम अल्टर: भारतीय सिनेमा के अनमोल रत्न की कहानी

टॉम अल्टर, भारतीय सिनेमा के एक अद्वितीय सितारे, का जन्म 22 जून 1950 को मसूरी में हुआ। उन्होंने पुणे के एफटीआईआई से अभिनय में स्वर्ण पदक प्राप्त किया और कई प्रसिद्ध फिल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं। उनके थियेटर करियर ने भी उन्हें एक नई पहचान दी। खेल पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए उन्हें याद किया जाता है, खासकर जब उन्होंने सचिन तेंदुलकर का पहला टीवी इंटरव्यू लिया। कैंसर से जूझते हुए भी उन्होंने अपने नाटक का मंचन किया। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ।
 

टॉम अल्टर का जीवन और करियर


नई दिल्ली, 21 जून। टॉम अल्टर का जन्म 22 जून 1950 को मसूरी में हुआ था। उनके दादा-दादी, एम्मेट और मार्था अल्टर, नवंबर 1916 में अमेरिका के ओहियो से भारत आए थे, जहाँ वे ईसाई मिशनरी के रूप में कार्यरत थे। 1947 के विभाजन ने उनके परिवार को भी प्रभावित किया, जिससे दादा-दादी पाकिस्तान के लाहौर में रह गए, जबकि टॉम अल्टर के माता-पिता भारत में बस गए और मसूरी के पास राजपुर में रहने लगे।


फिल्म 'आराधना' से प्रेरित होकर, टॉम ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एफटीआईआई) में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने 1974 में अभिनय में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री ने उनकी गोरी रंगत को देखकर उन्हें 'विदेशी खलनायक' या 'ब्रिटिश अधिकारी' के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन टॉम ने अपनी संवाद अदायगी और शुद्ध हिंदी-उर्दू के माध्यम से इन किरदारों को एक नई पहचान दी।


सत्यजीत रे की प्रसिद्ध फिल्म 'शतरंज के खिलाड़ी' (1977) में कैप्टन वेस्टन के रूप में उनकी भूमिका, जो अवध की संस्कृति और शायरी से प्रेम करता था, ने उन्हें खास पहचान दिलाई। इसके अलावा, 'क्रांति' (1981) और 'गांधी' (1982) में उनके ऐतिहासिक किरदारों ने भी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने 'परिंदा' (1989) में एक खतरनाक अंडरवर्ल्ड डॉन मूसा और 'राम तेरी गंगा मैली' (1985) में एक भारतीय ग्रामीण करम सिंह का किरदार निभाया।


1977 में, उन्होंने नसीरुद्दीन शाह और बेंजामिन गिलानी के साथ मिलकर 'मॉटली' थियेटर ग्रुप की स्थापना की। 29 जुलाई 1979 को पृथ्वी थिएटर में प्रदर्शित नाटक 'वेटिंग फॉर गोडोट' में उनके द्वारा निभाया गया 'लकी' का मूक किरदार आज भी भारतीय थियेटर का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।


टॉम अल्टर खेल के प्रति भी उतने ही उत्साही थे। 1983 में भारत की विश्व कप जीत के बाद, उन्होंने सुनील गावस्कर की 'इंडियन इलेवन' के लिए अमेरिका में एक प्रदर्शनी मैच खेला और एक विकेट भी लिया।


एक खेल पत्रकार के रूप में, टॉम अल्टर ने 19 जनवरी 1989 को बंबई के सीसीआई नेट्स पर 15 वर्षीय सचिन तेंदुलकर का पहला टीवी वीडियो इंटरव्यू लिया, जो एक ऐतिहासिक क्षण था।


टेलीविजन के सुनहरे दौर में, टॉम अल्टर ने 'जबान संभाल के', 'जुनून', और बच्चों के शो 'शक्तिमान' में अपने किरदारों के माध्यम से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया।


2016 में, उन्हें त्वचा के दुर्लभ कैंसर (स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा) का पता चला। कैंसर के चौथे चरण में भी, उन्होंने मार्च 2017 में अपने नाटक 'संस ऑफ बाबर' का मंचन किया। 29 सितंबर 2017 को इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया।