×

टॉम अल्टर: एक अद्वितीय अभिनेता और खेल पत्रकार की कहानी

टॉम अल्टर, एक अद्वितीय अभिनेता और खेल पत्रकार, का जन्म 22 जून 1950 को मसूरी में हुआ। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार भूमिकाएँ निभाईं और खेल पत्रकारिता में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। सचिन तेंदुलकर का पहला टीवी इंटरव्यू लेने वाले टॉम अल्टर ने भारतीय थियेटर में भी अपनी छाप छोड़ी। जानें उनके जीवन की प्रेरणादायक कहानी और उनके द्वारा निभाए गए किरदारों के बारे में।
 

टॉम अल्टर का जीवन और करियर


टॉम अल्टर का जन्म 22 जून 1950 को मसूरी में हुआ। उनके दादा-दादी, एम्मेट और मार्था अल्टर, 1916 में अमेरिका के ओहियो से भारत आए थे। विभाजन के समय, उनके दादा-दादी पाकिस्तान के लाहौर में रह गए, जबकि टॉम के माता-पिता भारत में बस गए।


फिल्म 'आराधना' ने उन्हें पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एफटीआईआई) में दाखिला दिलाया, जहाँ से उन्होंने 1974 में अभिनय में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। मुंबई में उनकी गोरी रंगत के कारण उन्हें 'विदेशी खलनायक' के रूप में पेश करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने अपनी संवाद अदायगी और हिंदी-उर्दू के ज्ञान से इन किरदारों को एक नई पहचान दी।


सत्यजीत रे की 'शतरंज के खिलाड़ी' में कैप्टन वेस्टन का किरदार हो या 'क्रांति' और 'गांधी' में ऐतिहासिक भूमिकाएँ, टॉम अल्टर ने हर जगह अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने 'परिंदा' में खूंखार डॉन मूसा और 'राम तेरी गंगा मैली' में भारतीय ग्रामीण करम सिंह की भूमिका निभाई।


1977 में, उन्होंने नसीरुद्दीन शाह और बेंजामिन गिलानी के साथ 'मॉटली' थियेटर ग्रुप की स्थापना की। 1979 में पृथ्वी थिएटर में 'वेटिंग फॉर गोडोट' में उनके द्वारा निभाया गया 'लकी' का मूक किरदार आज भी भारतीय थियेटर का एक मील का पत्थर माना जाता है।


टॉम अल्टर खेल के प्रति भी उतने ही उत्साही थे। 1983 में भारत की विश्व कप जीत के बाद, उन्होंने सुनील गावस्कर की 'इंडियन इलेवन' के लिए अमेरिका में एक प्रदर्शनी मैच खेला।


एक खेल पत्रकार के रूप में, टॉम अल्टर ने 19 जनवरी 1989 को 15 वर्षीय सचिन तेंदुलकर का पहला टीवी इंटरव्यू लिया, जो क्रिकेट की दुनिया में एक ऐतिहासिक क्षण था।


टेलीविजन के सुनहरे दौर में, टॉम अल्टर ने 'जबान संभाल के', 'जुनून', और 'शक्तिमान' जैसे शो में कई पीढ़ियों को प्रभावित किया।


2016 में, उन्हें त्वचा के दुर्लभ कैंसर का पता चला, लेकिन उन्होंने मार्च 2017 में अपने नाटक 'संस ऑफ बाबर' का मंचन किया। 29 सितंबर 2017 को, इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया।