टिस्का चोपड़ा और रूबी भाटिया: दो सितारे, दो अलग रास्ते
मनोरंजन की दुनिया में संघर्ष और सफलता
मुंबई, 31 अक्टूबर। मनोरंजन उद्योग में अपनी पहचान बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। हर दिन नए चेहरे इस क्षेत्र में कदम रखते हैं और अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते हैं। कुछ सितारे अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी होते हैं जो शोहरत के बाद एक अलग मार्ग चुन लेते हैं। ऐसी ही दो दिलचस्प शख्सियतें हैं टिस्का चोपड़ा और रूबी भाटिया।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों का जन्मदिन एक ही दिन, 1 नवंबर 1973 को आता है। दोनों ने मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बनाई, लेकिन उनके जीवन के निर्णय एकदम भिन्न रहे। टिस्का ने लगातार मेहनत करके अभिनय में सफलता प्राप्त की, जबकि रूबी ने स्टारडम के चरम पर पहुंचकर ग्लैमर की दुनिया से दूरी बना ली और अध्यात्म का मार्ग अपनाया।
टिस्का चोपड़ा आज हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में से एक मानी जाती हैं, जो अपने बेहतरीन अभिनय से हर किरदार में जान डाल देती हैं। उनका जन्म हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था। उनके पिता एक शिक्षाविद् थे। पढ़ाई के दौरान ही टिस्का का रुझान थिएटर और अभिनय की ओर बढ़ने लगा। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की और अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई का रुख किया।
मुंबई में, उन्होंने अभिनय में निपुणता हासिल करने के लिए नसीरुद्दीन शाह और फिरोज अब्बास खान जैसे दिग्गजों के साथ काम किया। 1993 में, उन्होंने फिल्म 'प्लेटफॉर्म' से अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि, शुरुआती दिनों में उन्हें वह पहचान नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी और छोटे-बड़े किरदारों के माध्यम से अपने अभिनय को निखारती रहीं।
टिस्का चोपड़ा के करियर में सबसे बड़ा मोड़ 2007 में आया, जब उन्होंने आमिर खान की फिल्म 'तारे जमीन पर' में काम किया। इस फिल्म में उन्होंने ईशान अवस्थी की मां का किरदार निभाया, जो अपने बच्चे से प्यार करती है लेकिन उसकी परेशानियों को समझ नहीं पाती। टिस्का ने इस भूमिका को इतनी खूबसूरती से निभाया कि दर्शक उनसे जुड़ाव महसूस करने लगे।
इस फिल्म ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई और उनके अभिनय की सराहना की गई। इसके बाद उन्होंने 'फिराक', 'रहस्य', 'किस्सा' और 'दिल तो बच्चा है जी' जैसी फिल्मों में काम किया। उनकी शॉर्ट फिल्म 'चटनी' भी काफी चर्चित रही, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। अभिनय के अलावा, टिस्का लेखन और फिल्म निर्माण में भी सक्रिय रही हैं। उनकी किताब 'एक्टिंग स्मार्ट' भी काफी लोकप्रिय हुई है।
वहीं, रूबी भाटिया की कहानी भी किसी फिल्मी सफर से कम नहीं है। उन्होंने उस समय मनोरंजन की दुनिया में कदम रखा, जब भारत में वीडियो जॉकी का कॉन्सेप्ट नया था। उन्हें देश की पहली वीडियो जॉकी के रूप में पहचान मिली। 1993 में, उन्होंने 'मिस इंडिया कनाडा' का खिताब जीता और फिर भारतीय टेलीविजन में अपनी शानदार होस्टिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया।
उनका आत्मविश्वास और बोलने का तरीका दर्शकों को बहुत पसंद आया। उन्होंने कई बड़े सितारों का इंटरव्यू लिया और 1996 में बेंगलुरु में आयोजित मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता को भी को-होस्ट किया। इसके अलावा, वह 'कसौटी जिंदगी की' जैसे लोकप्रिय टीवी शो और फिल्म 'चोरी चोरी चुपके चुपके' में भी नजर आईं।
जब वह मनोरंजन जगत में लोकप्रियता हासिल कर रही थीं, उसी समय उन्होंने ग्लैमर की दुनिया से दूरी बनाने का निर्णय लिया। लगभग 30 साल की उम्र में, उनका झुकाव अध्यात्म की ओर बढ़ने लगा। धीरे-धीरे, उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बदल दीं और बाहरी शोहरत के बजाय आंतरिक शांति को महत्व देना शुरू किया।