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जैकी श्रॉफ ने टुन टुन को दी भावुक श्रद्धांजलि, जानें उनकी अनोखी कहानी

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ ने मशहूर कॉमेडियन टुन टुन को उनकी जयंती पर भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की। इस लेख में जानें टुन टुन की अनोखी यात्रा, उनके करियर की शुरुआत, और कैसे उन्होंने हिंदी सिनेमा में कॉमेडी की नई परिभाषा स्थापित की। टुन टुन का योगदान आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है।
 

टुन टुन की जयंती पर जैकी श्रॉफ की श्रद्धांजलि


मुंबई, 11 जुलाई। प्रसिद्ध अभिनेत्री और कॉमेडियन टुन टुन को उनकी जयंती पर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ ने एक भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की।


जैकी श्रॉफ ने सोशल मीडिया पर टुन टुन के सुनहरे दिनों की एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें उन्होंने हाथ जोड़ने वाला इमोजी भी लगाया। उन्होंने लिखा, "उमा देवी खत्री (टुन टुन जी) हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी।"


इस पोस्ट में जैकी ने टुन टुन के जन्म और निधन की तारीखें भी साझा की: 11 जुलाई 1923 से 24 नवंबर 2003।


उमा देवी खत्री, जिन्हें टुन टुन के नाम से जाना जाता है, का जन्म 11 जुलाई 1923 को हुआ था। वह हिंदी सिनेमा की एक प्रमुख कलाकार थीं। उन्होंने 1940 के दशक के अंत में एक प्लेबैक सिंगर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।


म्यूज़िक डायरेक्टर नौशाद ने उन्हें अपने शुरुआती दिनों में एक बड़ा मौका दिया। 1947 की फिल्म 'दर्द' के गाने 'अफसाना लिख रही हूं दिल-ए-बेकरार का' से उन्हें व्यापक पहचान मिली। उमा देवी ने 'टुन टुन' नाम से प्रसिद्धि हासिल की, जो आगे चलकर हिंदी फिल्मों में कॉमेडी का प्रतीक बन गया।


उमा देवी को बॉलीवुड की पहली महिला कॉमेडियन के रूप में जाना जाता है। उन्होंने उस समय नई राहें खोलीं जब कॉमेडी भूमिकाएं ज्यादातर पुरुषों के पास होती थीं। कई दशकों तक, टुन टुन ने अपनी अद्भुत कॉमिक टाइमिंग, बेहतरीन अभिनय और सहज हास्य से दर्शकों का दिल जीता।


उन्होंने 'मिस्टर एंड मिसेज 55', 'प्यासा', 'मुजरिम', 'कोहिनूर', 'हाफ टिकट', 'दिल अपना और प्रीत पराई', 'आया सावन झूम के' और 'आंखें' जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया। 24 नवंबर 2003 को 80 वर्ष की आयु में उमा देवी का निधन हो गया।