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जैकी श्रॉफ: कैसे एक अनजान सलाह ने बदल दी उनके जीवन की दिशा?

जैकी श्रॉफ, हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता, ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया। पढ़ाई में रुचि न होने के बावजूद, उन्होंने अपने पिता के कहने पर स्कूल जाना शुरू किया। एक अनजान व्यक्ति की सलाह ने उन्हें मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखने का मौका दिया। जानें कैसे उन्होंने 'हीरो' फिल्म से अपने करियर की दिशा बदली और सफलता की सीढ़ी चढ़ी।
 

जैकी श्रॉफ का संघर्ष और सफलता


मुंबई, 31 जनवरी। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने अपनी अदाकारी से न केवल दर्शकों का दिल जीता है, बल्कि युवा पीढ़ी को नए फैशन से भी अवगत कराया है।


हम यहां बात कर रहे हैं जैकी श्रॉफ की, जिन्हें हिंदी सिनेमा में 'भिडू' के नाम से जाना जाता है। पढ़ाई में उनकी रुचि कम थी, लेकिन पिता के कहने पर उन्होंने स्कूल जाना शुरू किया। 1 फरवरी को जैकी अपना 69वां जन्मदिन मनाने वाले हैं।


आज जैकी श्रॉफ हिंदी सिनेमा के एक प्रमुख नाम हैं, लेकिन उनके जीवन में एक समय ऐसा भी था जब उन्हें अपने भविष्य के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी। उनका बचपन बेहद कठिनाइयों में बीता। मुंबई की चॉल में रहना और दो वक्त का खाना जुटाना उनके परिवार के लिए चुनौतीपूर्ण था। उनके पिता, काकूभाई श्रॉफ, एक बिजनेसमैन थे, लेकिन व्यापार में नुकसान के बाद ज्योतिष का काम करने लगे। उन्हें विश्वास था कि जैकी, जिनका असली नाम जयकिशन काकूभाई श्रॉफ है, बड़े स्टार बनेंगे, लेकिन गरीबी के कारण जैकी को अपने पिता की बात पर विश्वास नहीं था।


स्कूल जाना जैकी के लिए एक कठिनाई से कम नहीं था। पढ़ाई में उनकी कोई रुचि नहीं थी, लेकिन पिता के दबाव में उनकी मां ने उन्हें 7 साल की उम्र में स्कूल भेजा। एक दिन जैकी ने अपने पिता से कहा कि वह पढ़ाई छोड़ना चाहते हैं। उन्हें लगा कि पिता गुस्सा होंगे, लेकिन उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'कोई बात नहीं, तुम्हें तो एक्टर बनना है।'


परिवार का खर्च चलाने के लिए जैकी ने कई छोटे-मोटे काम किए। उन्होंने मूंगफली बेची, ताज इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में शेफ के रूप में काम किया और एक विज्ञापन एजेंसी में भी काम किया। लेकिन एक दिन बस स्टैंड पर एक अजनबी की सलाह ने उनकी जिंदगी बदल दी। उस व्यक्ति ने उनके लुक की तारीफ की और मॉडलिंग करने का सुझाव दिया। जैकी ने एक राष्ट्रीय विज्ञापन कंपनी के लिए अपना पहला मॉडलिंग प्रोजेक्ट हासिल किया, जिसमें उन्हें 7500 रुपये मिले। कई प्रोजेक्ट्स के बाद, उन्होंने 1982 में 'स्वामी दादा' फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की, जो देव आनंद की मदद से संभव हुई।


हालांकि, पहली फिल्म में उन्हें खास पहचान नहीं मिली, लेकिन उन्हें लीड रोल के लिए 'हीरो' फिल्म का प्रस्ताव मिला। यह फिल्म उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फिल्म के बाद उन्होंने कई अन्य फिल्मों पर हस्ताक्षर किए। कहते हैं कि जीवन में कुछ अच्छा पाने के लिए पहले कुछ बुरा सहना पड़ता है। 'हीरो' फिल्म की शूटिंग के दौरान जैकी का एक गंभीर एक्सीडेंट हुआ, जिसमें उनकी नाक और जबड़ा टूट गया। उन्हें डर था कि अब वह फिल्म से बाहर हो जाएंगे, लेकिन निर्देशक सुभाष घई ने उनकी स्थिति को समझा और फिल्म की शूटिंग पूरी की।


'हीरो' के बाद जैकी ने 'आज का दौर', 'युद्ध', 'कर्मा', 'त्रिमूर्ति', 'लज्जा', 'काश', और 'दिल ही तो है' जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया। लेकिन उन्हें हीरो बनाने में 'हीरो' फिल्म का बड़ा योगदान रहा, जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई।