जैकी भगनानी और रकुल प्रीत सिंह की शादी: एक नई शुरुआत की कहानी
जैकी भगनानी और रकुल प्रीत सिंह ने हाल ही में अपने रिश्ते और शादी के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वे एक-दूसरे पर निर्भर नहीं हैं और अपने-अपने में खुश हैं। जैकी ने अपने रिश्ते को 'सिचुएशनशिप' कहा, जिसमें पारदर्शिता और दोस्ती का महत्व है। जानें उनकी शादी की खास बातें और कैसे उन्होंने एक खूबसूरत डेस्टिनेशन वेडिंग का आयोजन किया।
Apr 23, 2026, 17:21 IST
जैकी और रकुल का रिश्ता
हाल ही में एक साक्षात्कार में जैकी भगनानी और रकुल प्रीत सिंह ने अपने रिश्ते के बारे में खुलकर चर्चा की। जैकी ने बताया कि वे एक-दूसरे की खुशियों के लिए निर्भर नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'हम अब युवा नहीं हैं, हमने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। मैं एक खुशमिजाज व्यक्ति हूं और किसी ऐसे साथी की तलाश नहीं कर रहा था जो मेरी जिंदगी में खालीपन भरे। अगर मैं खुद उदास हूं, तो कोई और मुझे खुश नहीं कर सकता। हम दोनों अपने-अपने में खुश हैं और एक साथ होने पर और भी ज्यादा खुश रहते हैं।'
रकुल का समर्थन
रकुल ने भी जैकी की बातों का समर्थन करते हुए कहा, 'हम एक-दूसरे का खालीपन नहीं भरते। अगर मुझे छुट्टी पर जाना है, तो मैं अकेले भी जा सकती हूँ। मेरे लिए, साथ होने का मतलब एक-दूसरे पर निर्भर रहना नहीं है।'
सिचुएशनशिप का मतलब
क्यों कहते हैं इसे सिचुएशनशिप?
हालांकि रकुल और जैकी ने शादी कर ली है, लेकिन जैकी इसे 'सिचुएशनशिप' कहना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, 'हमने शादी की है, जिसका मतलब है कि हम एक-दूसरे के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। लेकिन इस रिश्ते की खूबसूरती यह है कि मैं उससे किसी भी विषय पर बात कर सकता हूं और हमारे बीच गहरी दोस्ती है।'
पारदर्शिता का महत्व
जैकी ने बताया कि उनके रिश्ते में पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, 'अगर रकुल के सामने मेरी किसी पुरानी गर्लफ्रेंड का फोन आता है, तो मैं बिना किसी झिझक के उसे स्पीकर पर उठाता हूं। मैं अपनी पत्नी से कुछ भी नहीं छिपाता, और इसी पारदर्शिता के कारण हमें कभी कोई घुटन महसूस नहीं होती।'
शादी की जानकारी
रकुल और जैकी की शादी के बारे में
रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी ने 21 फरवरी 2024 को गोवा के आईटीसी ग्रैंड साउथ गोवा होटल में शादी की थी। तीन साल तक डेटिंग करने के बाद इस जोड़े ने एक खूबसूरत डेस्टिनेशन वेडिंग का आयोजन किया। उनकी शादी में दो अलग-अलग रस्में निभाई गई थीं, जिसमें दोपहर में 'आनंद कारज' और शाम को सिंधी रीति-रिवाजों से शादी हुई थी। इस निजी समारोह में केवल परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त शामिल हुए थे।